OP Rajbhar : गठबंधन की पहली ही परीक्षा में ओमप्रकाश राजभर फेल- यह एक गलती चुनाव में पड़ गई भारी
उपचुनाव में जातीय संतुलन को साधने के लिए प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक ने डेरा डाले रखा तो अनगिनत कैबिनेट व राज्यमंत्री एक-एक गांव में लगे रहे। फिर भी मतदाता के मूड में था कि उपचुनाव से सरकार की सेहत पर असर नहीं पड़ना है पर वर्ग विशेष के सहारे राजनीति की रोटी सेंकने वालों को जवाब देते हुए स्थानीय को महत्व दिया।

जागरण संवाददाता, मऊ : लोकसभा चुनाव 2024 के पहले सुभासपा के भरोसे पूर्वांचल की नैया पार करने की फिराक में लगी भाजपा को घोसी की जनता ने बड़ा झटका दिया है। गठबंधन की पहली ही परीक्षा में सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर बुरी तरह फेल हो गए।
घोसी की जनता ने बता दिया है कि जातियों के बने एक-एक दल के सहारे चुनावी बेड़ा पार नहीं किया जा सकता। इसमें बड़बोले नेताओं का यह कहना कि चौहान, राजभर आदि पिछड़े जब एक साथ हैं तो फिर किसी की जरूरत नहीं। ऐसे बोल ने मूल वोटरों को दूर कर दिया।
हालांकि उपचुनाव में जातीय संतुलन को साधने के लिए प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक ने डेरा डाले रखा, तो अनगिनत कैबिनेट व राज्यमंत्री एक-एक गांव में लगे रहे। फिर भी मतदाता के मूड में था कि उपचुनाव से सरकार की सेहत पर असर नहीं पड़ना है पर वर्ग विशेष के सहारे राजनीति की रोटी सेंकने वालों को जवाब देते हुए स्थानीय को महत्व दिया।
2017 के विधानसभा चुनाव में जनपद की तीन सीटें भाजपा के पास थी। इसमें मुहम्मदाबाद गोहना से श्रीराम सोनकर, घोसी से फागू चौहान व मधुबन से दारासिंह चौहान विधायक चुने गए थे। बीते 2022 विधानसभा चुनाव में सपा-सुभासपा गठबंधन का चेहरा रहे ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा के बड़े नेताओं पर कई टिप्पणियां की थीं।
इस चुनाव में सपा-सुभासपा का असर भी दिखा। जिसका परिणाम रहा कि सदर विधानसभा से सुभासपा से माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी, घोसी से सपा के दारा सिंह चौहान व मुहम्मदाबाद गोहना की सीट पर सपा के राजेंद्र कुमार ने जीत हासिल की।
इधर लोकसभा चुनाव के दृष्टिगत एक बार फिर सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर ने पाला बदला और एनडीए का हिस्सा बन गए। इसकी पहली परीक्षा दारासिंह चौहान के सपा से भाजपा में शामिल होने पर घोसी में हुए उपचुनाव में थी।
इस सीट पर सपा की प्रतिष्ठा जहां सीट बचाने की थी तो सुभासपा के समक्ष पूर्वांचल में अपनी साख बचाने की थी। हालांकि ओमप्रकाश राजभर ने घोसी विधानसभा में डेरा जमाए रखा। स्वजातीय मतों के साधने के लिए घर-घर तक गए। पर इधर लोकतंत्र में मतदाता ही सबकुछ है। मतदाता ने ठान रखा था कि उसे क्या करना है। शुक्रवार को आए परिणाम ने बता दिया कि लोकतंत्र में एक वर्ग विशेष के सहारे नैया पार नहीं हो सकती। भाजपा जितना पिछड़ों को साधने की कोशिश करती गई, उतना ही फारवर्ड क्लास ने छोड़ना शुरू किया।
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