जागरण संवाददाता, मऊ : राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद में 54 कुष्ठ रोगियों की पहचान की जा चुकी है। इसमें से 45 को सेल्फ केयर किट प्रदान की जा चुकी है। इसके पूर्व वर्ष 2020 में 67 रोगियों की पहचान की गई थी। दिसंबर 2021 तक 54 रोगी मिले हैं। यानी पिछले वर्ष की अपेक्षा 14 रोगी कम मिले हैं। इस तरह कुष्ठ रोगियों की संख्या घट रही है। यह जिलेवासियों के लिए शुभ संकेत हैं। इनका निश्शुल्क इलाज जिला अस्पताल, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के माध्यमों से किया जा रहा है। गृह भ्रमण और अभियान के दौरान जांच में व्यक्ति के अन्दर कुष्ठ रोग के लक्षण पाए जाते हैं तो उसको कुष्ठ की निश्शुल्क दवाएं तब तक दी जा रही है। जब तक उसका कुष्ठ रोग पूरी तरह से ठीक न हो जाए, तब तक इलाज किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत समुदाय को कुष्ठ रोग से निजात दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा खोजी एवं निगरानी अभियान तहत घर-घर जाकर कुष्ठ रोगियों के खोजने का कार्य कर रही हैं। साथ ही उनकी पूरी निश्शुल्क जांच और इलाज का प्रबंध भी कर रही है। कुष्ठ रोग लाइलाज नहीं है और कुष्ठ रोग का पूर्णत: उपचार संभव है। कुष्ठ रोगियों को स्पर्श करने से कुष्ठ रोग नहीं होता है। कुष्ठ रोगियों से भेदभाव न करें, उनके साथ समान व्यवहार और बर्ताव करें आदि के बारे में समय-समय पर आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा सभी को जानकारी भी दी जा रही है। जिला कुष्ठ रोग अधिकारी और नोडल डा. श्रवण कुमार ने बताया कि इस रोग के संक्रमण का कारण रोगाणु या बैक्टीरिया जिसे माईकोबैक्टीरियम लेप्री कहा जाता है। यही संक्रमण का कारण बनता है। कुष्ठ रोग का उपचार संभव है लेकिन इलाज में देरी होने से दिव्यांगता हो सकती है। यह संक्रमण रोगी की त्वचा को प्रभावित करता है तथा रोगी की तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचाता है।

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कुष्ठ रोग आंख और नाक में समस्याएं पैदा कर सकता है। कुष्ठ रोग से डरे नहीं, कुष्ठ रोगियों के साथ सामान्य रोगियों की तरह व्यवहार करें। कुष्ठ रोगी के साथ उठना, बैठना, खाना-पीना एवं सहज व्यवहार करने से उनमें हीन भावना नहीं जागृत होती है।

--डा. एसएन दुबे, सीएमओ

Edited By: Jagran