43 ग्राम पंचायतों के दावेदारों का टूटा सपना, नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
मार्च को घोषित ग्राम प्रधान पद के आरक्षण की सूची 21 दिनों बाद हाईकोर्ट के आदेश पर नए सिरे से परिवर्तित हुई तो ब्लाक की 43 ग्राम पंचायतों के दावेदार मैदान से ही बाहर हो गए।

जागरण संवाददाता, घोसी (मऊ) : 02 मार्च को घोषित ग्राम प्रधान पद के आरक्षण की सूची 21 दिनों बाद हाईकोर्ट के आदेश पर नए सिरे से परिवर्तित हुई तो ब्लाक की 43 ग्राम पंचायतों के दावेदार मैदान से ही बाहर हो गए।
तमाम संभावित दावेदार अरसे से मंसूबा बनाए थे। 02 मार्च को आरक्षण सूची अनुकूल घोषित होते ही प्रचार एवं जनसंपर्क में जुट गए। कुछ ने तो जेब ढीली करना प्रारंभ कर दिया था। इस बीच उच्च न्यायालय के आदेश पर वर्ष 2015 को आधार मानकर नए सिरे से आरक्षण सूची घोषित की गई तो महज औलियापुर, खुनशेखपुर, खैरा मुहम्मदपुर, गौरी, दरियाबाद, दरियाबाद मु मारूफपुर, नथनपुरा, पतिला, बरौली, बेला सुल्तानपुर, भटौली मलिक, मदीना, मलेरीकोट, माछिल जमीन माछिल, मैदासमसपुर, लाखीपुर एवं सरहरा में ही पूर्व की आरक्षण स्थिति बनी रह सकी। इन 17 ग्राम पंचायतों के अतिरिक्त एक दर्जन ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनमें आरक्षित श्रेणी तो बदली पर महज महिला से पुरूष या पुरूष से महिला के लिए उसी वर्ग में आरक्षित हुईं। ऐसे में इन गांवों में प्रत्याशियों का सिर्फ दिखावटी चेहरा ही बदलेगा। केरमा महरूपुर, गोड़सरा, पिढवल एवं मझवारा में प्रधान पद अनुसूचित स्त्री से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ है। कैथवली, चक मुसैय्यद, बरूहां एवं मुंगेसर में स्त्री के लिए आरक्षित पद अब अनारक्षित हो गया है तो लखनी मुबारकपुर एवं सद्दोपुर बासदेव में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित प्रधान पद अब पिछड़ा वर्ग स्त्री हो गया है। कलाफनपुर एवं हाजीपुर पूर्व में अनारक्षित थे पर अब नई सूची के अनुसार दोनों ग्राम पंचायतों के प्रधान पद स्त्री के लिए आरक्षित घोषित हैं।
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