'सागर में एक लहर उठी तेरे नाम की..'
मऊ : 'सागर में एक लहर उठी तेरे नाम की, तुझे मुबारक खुशियां आत्मज्ञान की....।' पूरे वातावरण में एक सरस स्निग्धता छाई हुई थी। प्रख्यात संत आर्ट आफ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर जी के बड़े से चित्र के समक्ष भक्तगण आंखे बंद किये मंत्रमुग्ध से उक्त भजन को दुहरा रहे थे। सभी भक्ति में लीन थे, चेहरे पर अपूर्व तेज था, हृदय आनंद से भरपूर। सबके सब मस्ती में झूम रहे थे। यह अद्भुत, अलौकिक एवं दिव्य सृष्टि उपस्थित हुई रविवार की सायं नगर के राजस्थान भवन में। होता भी क्यों नहीं, आखिर वहां उक्त आध्यात्मिक गुरु श्री श्री का जन्मोत्सव जो मनाया जा रहा था।
आर्ट आफ लिविंग के कार्यक्रमों में उक्त गीत प्राय: गाया जाता है परंतु इस बार फर्क यह था कि हर बार इसे गुरुदेव के भक्तों के जन्मदिन पर गाया जाता था, इस बार स्वयं गुरुदेव के जन्म दिन भक्तों ने इसे गाया। बेंगलुरु आश्रम से आये जनपद के ही मूल निवासी इंजीनियर पवन कुमार सिंह, अनुराग सिंह व प्रगति दी ने कार्यक्रम की शुरूआत गुरु पूजा से की। अपने अनुभव बताया कि कैसे गुरुदेव से जुड़े और उनसे प्रेरित होकर मानव सेवा और देश सेवा के लिए निकल पड़े। अनुराग ने जब भजन 'गणपति बप्पा मोरया..गणेश ओम' गाना शुरू किया तो भक्तिमय संगीत ने ऐसा वातावरण निर्मित किया कि सभी सुध-बुध खो उसी धारा में बहने को विवश हो गये। प्रशिक्षक पवन कुमार सिंह ने श्री श्री की वाणी में अनूठा ध्यान कराया। इस मौके पर मुख्य रूप से डा.विनोद कुमार सिंह, विजय शंकर सिंह, काशीनाथ कपूर, अर्चना कपूर, पंकज कपूर, संतोष बरनवाल, गणेश थरड, मधुलिका बरनवाल, त्रिवेणी प्रसाद, देवभूषण त्रिपाठी, ममता जायसवाल, मुकेश जायसवाल, आदि रहे।
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