योगेश जादौन, मथुरा: यमुना मिशन का काम जिस रफ्तार और नियोजन से चल रहा है वह बिना किसी मोटी मदद के संभव नहीं है। मिशन का नारा है कि वह चंदा नहीं लेते। अगर यह सच है तो उनके पास यमुना में पोकलेन मशीन और ट्रैक्टर के साथ मजदूरों की एक बड़ी संख्या को मेहनताना देने को धन कहां से आ रहा है।

यमुना मिशन के संस्थापक व्यवसायी प्रदीप बंसल हैं। यमुना में यहां उनके कामों के कर्ताधर्ता अनिल शर्मा हैं। मिशन का नारा है कि वह चंदा नहीं लेते। काम केवल मानव श्रम से ही नहीं चल रहा है। यहां खुदाई के लिए पोकलेन मशीन, ढुलाई के लिए ट्रैक्टर, पानी के लिए टैंकर और पंपसेट हैं। बागवानी और अन्य कामों के लिए मजदूर लगे हैं। यमुना में इसी बरसात आई बाढ़ से मिशन के पाथवे का एक हिस्सा बह गया। इस हिस्से को जिस तेजी से मिशन ने पूरा कराया उससे साफ है कि उनके पास काम तेजी से काम करने के संसाधन हैं। इस संसाधन के लिए धन कहां से आता है। यह सवाल जब यमुना मिशन के डायरेक्टर अनिल शर्मा से पूछा गया तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। कहा कि प्रदीप बंसल से मिशन को सहायता मिलती है। वह जब आते हैं मदद करके जाते हैं। बाकी का काम किसी न किसी की मदद से चल जाता है। प्रदीप बंसल का कोई संपर्क नंबर उनके पास नहीं है।

मजे की बात यह कि आज जब मिशन के कामों की जांच के लिए मजिस्ट्रेटी टीम यमुना किनारे पहुंची तो यमुना मिशन की ओर से कोई भी पदाधिकारी अपना पक्ष रखने के लिए नहीं आया।

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