जागरण संवाददाता, मथुरा: यमुना किनारे कराए गए कार्यों को लेकर बुधवार को ¨सचाई विभाग ने यमुना मिशन को नोटिस थमा दिया है। सात दिन में जबाव मांगा गया है। पूछा गया है कि किसकी मंजूरी से ये कार्य कराए गए थे। इसके साथ ही यह कहा गया है कि क्यों ने यमुना मिशन के खिलाफ विधिक कार्यवाई की जाए। नोटिस मिलते ही यमुना मिशन के कर्ताधर्ताओं में खलबली मच गई है।

यमुना नदी के बाढ़ इलाके में पानी की धारा को रोकने का काम नहीं कराया जा सकता है। मगर, यमुना के घाट और धारा के बीच 80 फुट चौड़ी, छह फुट ऊंची कच्ची सड़क बना दी गई है। ये यमुना मिशन संस्था ने कराया। इसकी कोई मंजूरी भी यमुना मिशन ने नहीं ली। पर्यावरण और यमुना बचाने के नाम पर कंसटीला से मोक्षधाम तक करीब नौ किलोमीटर यमुना की धार के किनारे ये सड़क बनाई गई थी। पौधारोपण भी कराया। सड़क का नाम भी यमुना मिशन रख दिया गया। दस नालों को मोड़ दिया गया। कंस टीला और कृष्णगंगा घाट के पास यमुना मिशन नाम का एक नया घाट विकसित किया गया। बच्चों के झूले और फिसलन बनवाई गई। महिला पार्क बनाया गया। इस मामले को दैनिक जागरण ने उजागर किया तो प्रशासन हरकत में आ गया। डीएम सर्वज्ञराम मिश्र ने तीन सदस्यीय कमेटी से इसकी जांच कराई। बुधवार को ¨सचाई विभाग के नोडल अधिकारी अधिशासी अभियंता आगरा कैनाल आगरा एमएम ¨सह ने बताया कि यमुना मिशन के डायरेक्टर अनिल शर्मा को नोटिस दे दिया गया है। यमुना किनारे कार्य कराने की मंजूरी से संबधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। इस समय अवधि में नोटिस का जबाव न मिलने पर यमुना मिशन के कर्ताधर्ताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।

Edited By: Jagran