जागरण संवाददाता, मथुरा: यमुना नदी मे यमुना मिशन के कामों की जिला प्रशासन ने जांच की है। अब मानव संसाधन विकास, जल संसाधान, नदी विकास एवं गंगा सफाई मंत्रालय के राज्यमंत्री सत्यपाल ¨सह ने भी नदी विकास मंत्रालय से इसकी जांच कराने को कहा है। साथ ही वह यमुना रिवर बोर्ड को भी इसके लिए लिखेंगे। मंगलवार को सौंख कस्बे में आए सत्यपाल ने नगला आशा में दैनिक जागरण से खास बातचीत की। बातचीत के प्रमुख अंश..

- प्रश्न: नदियों के किनारे तेजी से अतिक्रमण हो रहा है। इसके लिए कौन-सा एक विभाग जिम्मेदार है।

- उत्तर: नदी किनारे के अतिक्रमण के लिए समाज और सरकारी महकमा दोनों जिम्मेदार हैं। अफसरों को नदियों की निगरानी करनी चाहिए। अतिक्रमण नहीं होने देना चाहिए। यदि अतिक्रमण होता है, तो यह गंभीर विषय है। - प्रश्न: मथुरा में यमुना मिशन ने यमुना में करीब 10 किमी में बिना अनुमति पाथवे बनाया है। यह कार्य पिछले तीन-चार साल में हुआ है। स्थानीय प्रशासन और यमुना रिवर बोर्ड खामोश रहा।

- उत्तर: मैं बुधवार को ही मंत्रालय को पत्र लिखकर मामले की जांच कराऊंगा। केंद्र के अधीन न होने के कारण यमुना रिवर बोर्ड से भी जांच करने के लिए यूपी सरकार को भी पत्र लिखा जाएगा। अतिक्रमण मिलने पर संबंधित अफसरों की भूमिका की जांच कराई जाएगी। -प्रश्न: नदियों के विकास और उनकी सफाई को केंद्र सरकार क्या कर रही है। क्या कोई ऐसी नीति बनाई जा रही है, जिससे नदियां अतिक्रमण मुक्त हो सकें। उनका पानी निर्मल बना रहे।

-उत्तर: यमुना की सफाई को 28 प्रोजेक्ट मंजूर किए गए है। एक दर्जन प्रोजेक्ट्स पर दिल्ली में काम हो रहा है। यमुना और गंगा की सफाई केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। नदियों के किनारे अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ स्थानीय प्रशासन को मामले दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। इस संबंध में पहले ही निर्देश जारी हो चुके थे।

- प्रश्न: क्या नदियों के किनारे खादर की भूमि पट्टे पर दी जा रही है।

-उत्तर: यह कार्य स्थानीय प्रशासन करता है। ये पट्टे केवल खेती के लिए अस्थाई तौर पर दिए जाते हैं। यहां कोई पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता है।

Edited By: Jagran