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    Radhashtami 2025: श्वेत झबला में राधा का जन्माभिषेक, स्वर्णिम शृंगार से बरसी कृपा; QR कोड से किए दर्शन

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 07:40 AM (IST)

    बरसाना में राधाष्टमी पर ब्रह्मांचल पर्वत ने फिर इतिहास रचा। राधारानी के जन्माभिषेक को इस बार वैश्विक स्तर पर प्रसारित किया गया ताकि दूर बैठे भक्त भी क्यूआर कोड और यूट्यूब चैनल के माध्यम से दर्शन कर सकें। राधारानी का अभिषेक पंचामृत से होता है और वे विशेष पोशाक में भक्तों को दर्शन देती है। इस आयोजन से लाखाें भक्तों को दिव्यता का अनुभव हुआ।

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    राधारानी जन्मोत्सव पर झूमते और नाचते श्रद्धालु। जागरण

    रसिक शर्मा, जागरण, बरसाना। बरसाना के ब्रह्मांचल पर्वत ने इस भादों मास की शुक्ल अष्टमी पर फिर से इतिहास रचा। भोर की बेला में जब बृषभानु नंदनी श्वेत झबला धारण कर जन्माभिषेक की झलक दी, तब संपूर्ण ब्रजभूमि भाव-शृंगार की अमृतधारा में डूबी दिखी।

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    मंदिर प्रबंधन ने इस बार राधाष्टमी पर होने वाले जन्माभिषेक को केवल बरसाना तक सीमित न रखकर इसे वैश्विक आयाम देने की तैयारी की थी। पहली बार श्रद्धालु घर बैठे क्यूआर कोड और आधिकारिक यूट्यूब चैनल @ mandirshriladleejimaharaj के माध्यम से जन्माभिषेक का साक्षात्कार किए। मंदिर से जुड़े सुशील गोस्वामी ने बताया कि तकनीक का यह प्रयास उन श्रद्धालुओं के लिए है जो बरसाना तक नहीं पहुंच पाते, किंतु राधा नाम की कृपा से वंचित नहीं रहना चाहते।

    पहली बार तकनीक के संग जुड़ेगा राधाष्टमी का भाव-सागर

    सिर्फ इतना ही नहीं, कस्बे की गलियों और मंदिर मार्ग पर विशाल एलईडी स्क्रीन भी लगाई गईं, ताकि भीड़ में फंसे श्रद्धालु भी जन्माभिषेक और शृंगार की आनंदधारा में डूब सकें। भोर चार बजे राधारानी का जन्माभिषेक पंचामृत से सम्पन्न होता है, जिसमें वे श्वेत पोशाक में दर्शन देती हैं। इसके बाद मंगला शृंगार में पीले रंग की पोशाक और स्वर्ण–रजत जड़ित अलंकरण से सुसज्जित होकर शीश महल से भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। लुधियाना के विशेष कारीगरों द्वारा बनी इस पोशाक में सूक्ष्म हस्तकला और जड़ाव का अद्भुत संगम है।

    इस बार घर बैठे दर्शन

    श्रद्धालु कहते हैं कि अभिषेक और शृंगार के क्षण ही राधाष्टमी की आत्मा होते हैं। इस बार लाखों की भीड़ के बीच तकनीक के सहारे लाखाें भक्तों ने घर बैठे ही इस दिव्यता का साक्षात्कार किया। बरसाना की हवाओं में राधा नाम की सुगंध और जन्माभिषेक की आभा मिलकर ऐसा दृश्य रचती है, जिसे शब्दों में नहीं, केवल भाव में अनुभव किया जा सकताहै।