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    शिक्षा की बगिया गूंजी, पहले दिन गिनती के बच्चे

    पहले दिन खुले स्कूल तो पढ़ाई नहीं हाल-जाना जाना तकहीं तिलक लगाकर स्वागत कहीं खाली बैठे बचे

    By JagranEdited By: Updated: Fri, 17 Jun 2022 06:10 AM (IST)
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    शिक्षा की बगिया गूंजी, पहले दिन गिनती के बच्चे

    जागरण संवाददाता, मथुरा : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय गर्मी के अवकाश के बाद गुरुवार से खुल गए। पहले दिन शिक्षा की बगिया बच्चों से गूंज उठी। हालांकि बच्चों की संख्या काफी कम रही। पहले दिन छात्र-छात्राओं ने एक-दूसरे का हाल जाना। पढ़ाई के नाम पर खानापूरी ही रही। कहीं तिलक लगाकर बच्चों का स्वागत किया गया, कहीं नियमित स्कूल आने की नसीहत दी गई।

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    कोरोनाकाल के कारण शैक्षिक सत्र 2019-20 व 2020-21 में विद्यालय बंद होने के कारण शैक्षिक गतिविधियां प्रभावित रहीं। शैक्षिक सत्र 2021-22 में पढ़ाई पटरी पर लाने को 16 जून से विद्यालय खोले गए। जिले में 1536 विद्यालय गुरुवार से खुल गए। इसमें 948 प्राथमिक और 589 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। विद्यालयों में पढ़ाई सुबह 7.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक हुआ। छात्र-छात्राएं भी पूरे उत्साह के साथ विद्यालय पहुंचे। काफी दिनों के बाद मिलने पर एक-दूसरे का हाल जाना और पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। कमला नेहरू प्राथमिक विद्यालय दो डैंपियरनगर में 107 में से केवल 20 छात्र-छात्राएं ही विद्यालय पहुंचे थे। श्रद्धानंद प्राथमिक विद्यालय झींगुरपुरा में 163 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन पहले दिन 35 छात्र-छात्राएं ही पहुंचे। छात्र-छात्राओं का तिलक कर स्वागत किया गया। प्राथमिक विद्यालय सिहोरा प्रथम में 227 में 18 छात्र-छात्राएं ही पहुंचे। प्राथमिक विद्यालय जवाहर पार्क कोसीकलां में 72 में 12 विद्यार्थी ही पहुंचे। सुरीर के प्राथमिक विद्यालय में 209 में से केवल आठ बच्चे ही पढ़ने पहुंचे। उच्च प्राथमिक विद्यालय पसौली गोवर्धन में 134 में 45 विद्यार्थी ही उपस्थित हुए। कार्यवाहक बीएसए राजलक्ष्मी पांडे ने बताया कि पहले दिन छात्र-छात्राओं की संख्या काफी कम रही है। करीब 40-50 फीसद छात्र-छात्राओं के विद्यालय आने का अनुमान है। बच्चे भी बाहर गए हुए हैं। एक ही छात्र आया विद्यालय

    राया : राया प्राथमिक विद्यालय कोयल में 144 में से केवल एक छात्र ही विद्यालय पहुंचा। प्रधानाध्यापिका भी बिना अवकाश लिए ही अनुपस्थित रहीं। यहां एक छात्र होने के कारण पढ़ाई नहीं हो सकी। क्या कहते हैं छात्र-छात्राएं

    विद्यालय खुलने का इंतजार कर रहे थे। पढ़ाई करनी है, ताकि भविष्य उज्ज्वल हो सके। मन लगाकर पढ़ना है और सभी काम समय से करना है।

    पुनीत-कक्षा पांच,श्रद्धानंद प्राथमिक विद्यालय जीवन संवारने के लिए पढ़ाई आवश्यक है। पढ़ाई के बिना कुछ नहीं हैं। इसलिए पहले दिन से ही विद्यालय आना शुरू कर दिया है, ताकि पढाई प्रभावित न हो।

    डौली-कक्षा चार, कमला नेहरू

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    स्कूल आने के लिए बुधवार को ही तैयारी पूरी कर ली थी, यह नहीं सोचा कि पहले दिन विद्यालय नहीं जाएं। पहले दिन से ही विद्यालय आने की आदत डालनी चाहिए।

    देव-कक्षा चार, प्राथमिक विद्यालय, सिहोरा प्रथम

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    विद्यालय आकर सीखने को मिलता है और पढ़ाई में भी मन लगता है।हर विद्यार्थी को विद्यालय आना चाहिए। विद्यालय न आने से भविष्य भी खराब होता है।

    कीर्ति-कक्षा चार, प्राथमिक विद्यालय सिहोरा प्रथम