अभी और बढ़ेंगीं PCS अधिकारी किरन चौधरी की मुश्किलें, 70 हजार रुपये रिश्वत केस में विजिलेंस टीम की जांच तेज
Kiran Chaudhary Bribe Case Update पीसीएस अधिकारी किरन चौधरी को मथुरा में 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है। विजिलेंस टीम ने उनके निजी आवास से उन्हें और उनके निजी चालक बिजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया था। टीम ने विकास भवन में आठ घंटे जांच की और कई कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। डीएम ने डीडीओ को नोडल अधिकारी बनाया है।
जागरण संवाददाता, मथुरा। ग्राम प्रधान से 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ी गईं डीपीआरओ किरन चौधरी और उनके निजी चालक बिजेंद्र सिंह को जेल भेजने के बाद आगरा की विजिलेंस टीम ने जांच तेज कर दी है। शुक्रवार को टीम ने आठ घंटे विकास भवन में गुजारे।
कर्मचारियों के बयान दर्ज करने के साथ भी विभिन्न योजनाओं के अभिलेख खंगाले। टीम की मदद के लिए डीएम ने डीडीओ को नोडल अधिकारी बना दिया है। उधर, डीएम ने कार्य संभालने के लिए शासन को पत्र लिख नई डीपीआरओ की तैनाती की मांग की है।
चालक को रिश्वत लेते पकड़ा था
मंगलवार को डीपीआरओ व उनके चालक को उनके इंद्रप्रस्थ कॉलोनी स्थित निजी आवास से गांव झुड़ावई के प्रधान प्रताप सिंह राना द्वारा 70 हजार रुपये रिश्वत लेते विजिलेंस टीम ने दबोच लिया था। अब विजिलेंस टीम पूर्व में की गई भ्रष्टाचार की शिकायतों की भी पड़ताल कर रही है। एक-एक शिकायतकर्ता के भी बयान लेगी। शुक्रवार को सुबह साढ़े नौ बजे एक टीम राजीव भवन पहुंची। यहां पर अभिलेख खंगालने के साथ कई कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। कुछ अभिलेख भी टीम ने कब्जे में लिए। करीब पांच बजे तक टीम जांच करने के साथ ही बयान दर्ज करती रही।
डीएम से नोडल अधिकारी बनाए
डीएम से टीम ने सहयोग के लिए नोडल अधिकारी मांगा था, इस पर डीएम ने डीडीओ गरिमा खरे को पंचायत राज विभाग से संबंधित सूचनाएं और अभिलेख उपलब्ध करने को नोडल अधिकारी बनाया है। डीएम चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि शासन को पत्र लिखकर नई डीपीआरओ की तैनाती की मांग की गई है, ताकि काम प्रभावित न हो। एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा ने बताया कि अभी कई चरण में जांच की जाएगी।
कॉलोनी का सचिव भी संदेह के घेरे में
जिस इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में डीपीआरओ रहती थीं, उसी कॉलोनी में विभाग का एक पंचायत सचिव भी रहता है। वह डीपीआरओ का काफी करीबी बताया जाता है। विजिलेंस टीम को उस सचिव के बारे में भी जानकारी दी गई है। टीम सचिव की कुंडली भी खंगाल रही है।
आंगनबाड़ी किट खरीद में कर्मियों के रिश्तेदारों की थी फर्म
आंगनबाड़ी केंद्रों में खिलौने की किट वितरित करने में पंचायत राज विभाग ने बड़े पैमाने पर खेल किया था। 20 हजार रुपये से भी कम कीमत वाली किट की खरीद 60 से 66 हजार रुपये में दिखाई गई। दैनिक जागरण ने पूर्व में इस घोटाले का पर्दाफाश किया था। जांच में अनियमितता मिली, अब कार्रवाई का इंतजार है। किट बेचने वाली बड़ी संख्या में फर्में फर्जी थीं और विभाग के सचिव और अन्य कर्मियों के स्वजन और रिश्तेदारों के नाम से बनाई गईं, विजिलेंस टीम अब इन फर्मों के बारे में भी पड़ताल कर रही है।
दर्जनों फाइलें अटकी, काम प्रभावित
डीपीआरओ क गिरफ्तारी के बाद दर्जनों फाइलें अटक गई हैं। ऐसे में विकास कार्य भी प्रभावित होने लगे हैं। प्रभारी डीपीआरओ की नियुक्ति के लिए शासन से गाइड लाइन मांगी गई है। स्वच्छ भारत मिशन, श्मशान घाट निर्माण, बाउंड्रीवाल, ग्राम सचिवालय, नाली खड़ंजा और शौचालय आदि से संबंधित फाइलें डीपीआरओ के हस्ताक्षर के बिना अटकी हैं। अभी डीपीआरओ के निलंबन का पत्र शासन से नहीं आया है, ऐसे में प्रभारी डीपीआरओ बनाने का पेंच फंसा है। जब तक तैनाती नहीं होगी, तब तक हस्ताक्षर नहीं होंगे।
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सीना तान पहुंच रहे ग्राम प्रधान
विजिलेंस जांच के चलते पंचायत राज विभाग के कर्मचारियों की नींद उड़ी है। भ्रष्टाचार के खेल में विभाग के कई कर्मचारी लिप्त हैं। ऐसे में उन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। उधर, ग्राम प्रधानों के हाव-भाव भी बदल गए हैं। कार्यालय में ग्राम प्रधान सीना तानकर पहुंच रहे हैं।
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