गंगाजल परियोजना देरी पर मथुरा में अधिकारियों को फटकार, मुख्यमंत्री के दूत ने रिकॉर्ड कर ली जमीनी हकीकत
मथुरा में ग्रामीण गंगाजल पेयजल परियोजना की धीमी गति पर मुख्यमंत्री के दूत ने अधिकारियों को फटकार लगाई। यह परियोजना जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को खारे पानी से मुक्ति दिलाना था डेढ़ साल की देरी के बाद भी अधूरी है। नोडल अधिकारी कुमार प्रशांत ने विभिन्न परियोजनाओं का निरीक्षण किया और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीणों से जानकारी प्राप्त की और अधिकारियों को लापरवाही के लिए फटकारा।
जागरण संवाददाता, मथुरा। सरकारी सिस्टम का यह स्याह सच है। महत्वाकांक्षी ग्रामीण गंगाजल पेयजल परियोजना डेढ़ वर्ष की देरी के बाद भी पूरी नहीं होती नहीं दिख रही है। यह हाल तब है जब ग्रामीण जनता भूजल के खारे पानी को पीकर बीमारियों से घिर रही है।
भूजल पेयजल की गुणवत्ता खराब होने का मामला एनजीटी भी शासन के समक्ष उठा चुकी है। मुख्यमंत्री के दूत ने शनिवार को जिले में संचालित ग्रामीण गंगाजल पेयजल परियोजना, वृंदावन में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण और पुल निर्माण कार्य की जीनी हकीकत जानी।
गंगाजल परियोजना की रफ्तार बहुत धीमी होने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कठघरे में खड़ा कर दिया। साफ कहा, जो परियोजना वर्ष 2024 में पूरी होनी थी, उसकी आज तक प्रगति काफी धीमी है। इस शिथिलता पर अधिकारियों से भी नाराजगी जताई। वह रिपोर्ट आख्या शासन को देंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हर जिले में 50 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की जमीनी हकीकत जानने की जिम्मेदारी उच्चाधिकारियों को दी। इसके तहत समाज कल्याण विभाग के निदेशक कुमार प्रशांत को मथुरा का नोडल अधिकारी बनाया।
उनको 4000 करोड़ रुपये की ग्रामीण गंगाजल पेयजल परियोजना, 55 करोड़ से पानीगांव में यमुना पर पुल निर्माण कार्य एवं 50 करोड़ की वृंदावन के सुनरख बांगर में 13 एमएलडी के एसटीपी निर्माण कार्य के स्थलीय निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई। इसके तहत शनिवार को नोडल अधिकारी जिले में आए।
पहले वे एसटीपी निर्माण स्थल पर पहुंचे। यहां कार्य को देखा और समय पर कार्य पूर्ण करने को कहा। इसके बाद वह पानीगांव पर निर्माणाधीन पुल पर पहुंचे। यहां कार्य की रफ्तार तेज करने के निर्देश लोनिवि अधिकारियों को दिए। इसके बाद उन्होंने ग्रामीण गंगाजल पेयजल परियोजना को देखा।
यहां से वह जौनई व बसई बुजुर्ग गांव पहुंचे। यहां पाइपलाइन कार्य को देखा। ग्रामीणों से भी कार्य के बारे में जानकारी की। कार्य की रफ्तार काफी धीमी होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कहा, ये परियोजना वर्ष 2024 में पूरी होनी थी। लेकिन, एक वर्ष की देरी के बाद भी अब तक परियोजना की गति बहुत धीमी है।
इससे साफ है कि जल निगम ग्रामीण के अधिकारी अपनी देखरेख में कंपनी से काम नहीं करा रहे। इसके बाद वह कान्हा गोशाला पहुंचे। यहां गोशाला का रखरखाव देखा। उनके साथ सीडीओ मनीष मीणा, महाप्रबंधक जल मोहम्मद अनवर ख्वाजा, जल निगम ग्रामीण के एक्सईएन दिनेश कुमार, सहायक अभियंता भूपेंद्र कुमार, अवर अभियंता नमामि गंगे नरेश कुमार आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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