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    Mathura: सोने के सूर्य प्रभा रथ पर बैठ नगर भ्रमण को निकले ठा. गोदारंगमन्नार, पढ़िए सूर्य प्रभा सवारी का महत्व

    By Jagran NewsEdited By: Abhishek Saxena
    Updated: Sun, 12 Mar 2023 10:49 AM (IST)

    Mathura Brahmotsav In Rangji Mandir News वृंदावन के रंगजी मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव में सूर्यप्रभा रथ पर विराजे भगवान मंदिर परिसर भगवान रंगनाथ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। भक्तों की उमड़ रही है ब्रह्मोत्सव में भीड़।

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    रंगजी मंदिर में ब्रह्मोत्सव में सोने के सूर्यप्रभा रथ में विराजमान होकर नगर भ्रमण को निकले ठा. गोदारंगन्नार l जागरण

    संवाद सहयोगी, वृंदावन-मथुरा। दक्षिण भारतीय परंपरा के रंगजी मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव में शनिवार सुबह ठा. गोदारंगमन्नार सोने के सूर्यप्रभा रथ में विराजमान होकन नगर भ्रमण को निकले। मंदिर में मौजूद भक्तों के जयकारे से वातावरण गूंज उठा। मंदिर से बाहर निकलकर ठाकुरजी की सवारी नगर निगम चौराहा होते हुए बड़ा बगीचा पहुंची। शाम को चांदी के हंस पर सवार होकर निकले भगवान रंगनाथ के दर्शन को भक्तों की भीड़ उमड़ी।

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    भगवान की सवारी देखने उमड़े भक्त

    रंगजी मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव में शनिवार को भगवान रंगनाथ माता गोदा (लक्ष्मीजी) के साथ सोने के सूर्य प्रभा पर विराजमान हो कर निकले। भगवान की सवारी पालकी में विराजमान हो कर रथ मंडप पर पहुंची। जहां भगवान को सूर्य प्रभा वाहन पर विराजमान किया गया। रथ मंडप से सूर्य प्रभा पर विराजमान होकर भगवान रंगनाथ की सवारी मंदिर प्रांगण में स्थित बारहद्वारी पर पहुंची। जहां मंदिर के महंत गोवर्धन रंगाचार्य के नेतृत्व में पुजारियों एवं दक्षिण भारत से आए विद्वानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य सस्वार भगवान का पाठ किया। यहां सवारी करीब 10 मिनट तक खड़ी रही।

    कपूर आरती हुई

    पाठ पूर्ण होने के बाद भगवान की कपूर आरती की गई। इसके पश्चात भगवान की सवारी नगर भ्रमण के लिए निकली। परंपरागत वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच भगवान सोने से बने सूर्य प्रभा वाहन पर विराजमान होकर मंदिर से बहार निकले।

    सूर्य प्रभा सवारी का यह है महत्व

    ब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन निकलने वाली भगवान रंगनाथ की सवारी का महत्व बताते हुए मंदिर के रघुनाथ स्वामी ने बताया भगवान सूर्य ब्रह्मांड में प्रकाश करते हैं, लेकिन उनके अंदर प्रभा प्रभु की ही है। क्योंकि नारायण उन सवित्र देव के मध्य विराजमान हो कर अपनी शक्ति से सूर्य देव बनाए हैं। इस सवारी में बैठे प्रभु के दर्शन करने से दृष्टि दोष दूर होता है।