अध्ययन और अभ्यास द्वारा शुद्ध लेखन करना सीखें
आचार्य पं0 पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने समझाई हिन्दी की शुद्धता

संवाद सहयोगी, मथुरा : हिन्दी हमारी मातृभाषा है, इसलिए हमारा अपनी भाषा के प्रति उत्कट अनुराग होना चाहिए। हमें अपनी मां के प्रति जितनी श्रद्धा होती है, उतनी ही अपनी भाषा के प्रति भी होनी चाहिए। हम अपनी हिन्दी-भाषा का समादर तभी कर पाएंगे, जब उसको शुद्धता के अलंकरण से सुसज्जित कर सकेंगे। अध्ययन और अभ्यास द्वारा हमारे विद्यार्थी शुद्ध लेखन-वाचन करना सीख सकते हैं।
•िाला शिक्षा एवं प्रशिक्षण-केन्द्र (डाइट) के संयोजन में आयोजित तीन दिवसीय हिन्दीभाषा-शिक्षण-कर्मशाला के दूसरे दिन प्रयागराज से आए भाषाविज्ञानी और समालोचक आचार्य पं0 पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने शिक्षकों को हिन्दी में शुद्धता के गुर सिखाए।
उन्होंने देश-काल-परिस्थिति- पात्र के अनुसार किन शब्दों का कहां और क्यों प्रयोग किया जाता है, इन्हें विधिवत समझाया। किस शब्द के अन्तर्गत किस वर्ण पर 'रेफ' का प्रयोग किया जाता है, उन्होंने इसे समझाने के लिए 'अन्तर्जाल', 'अन्तध्र्यान' जैसे शब्दों को लिखकर अर्थसहित बताया। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी अर्द्ध अक्षर पर कोई मात्रा नहीं लगती, क्योंकि ऐसे अक्षर लंगड़े होते हैं।
उन्होंने मैं, मैंने, हमें , दोनों, तीनों, अपनों आदिक शब्दों में बिन्दी के प्रयोग को अशुद्ध और अनुपयुक्त बताया। उन्होंने 'पूर्वग्रह' और 'पूर्वाग्रह' को शुद्ध बताते हुए, दोनों के अर्थ को उदाहरण के साथ स्पष्ट किया। उन्होंने लगभग उन सौ शब्दों और वाक्यों के शुद्ध प्रयोग प्रशिक्षणार्थियों को बताए, जो प्राय: सामान्य और प्रतियोगितात्मक परीक्षाओं के लिखित और मौखिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में किए जाते हैं। खास बात ये रही कि मुख्य प्रशिक्षक हिन्दी भाषा के तद्भव, तत्सम, देशज, विदेशज, शब्दों को समझाने के लिए प्रशिक्षणार्थियों के पास पहुंचते और ये देखते कौन क्या कर रहा है। वे उनकी वर्तनी भी सुधारते थे। जो प्रशिक्षणार्थी प्रश्नों के उत्तर देने से बचने की कोशिश करते थे अथवा निष्क्रिय दिखते थे, उन्हें मंच पर रखे गए बोर्ड पर लिखवाते थे और सभी अशुद्ध-शुद्ध शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग, प्रत्यय, धातु, संधि, समास, कारक आदिक को समझाने की शैली में लिखते और बताते थे।
डा. राजनाथ ने हिन्दी-साहित्य का इतिहास पर अध्यापकीय प्रकाश डाला, जबकि डा. नीतू गोस्वामी ने रोचक ढंग से समास, अलंकार तथा रस को समझाया। प्राचार्य महेन्द्र कुमार सिंह ने इस शैक्षणिक आयोजन का प्रभावकारी संयोजन और संचालन किया। इस सारस्वत आयोजन में अमित कुमार, रमेशकुमार, सत्यप्रकाश, नमित शर्मा, श्रद्धा गौतम, प्रीति मौजूद रहे।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।