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    गिरिराजजी की अनूठी भक्ति: कठिनतम साधना है दंडवती परिक्रमा, एक ही जगह 1161 बार दंडवत कर आगे बढ़ते हैं भक्त

    By Jagran NewsEdited By: Shivam Yadav
    Updated: Sun, 06 Jul 2025 11:30 AM (IST)

    गोवर्धन में गिरिराज जी की दंडवती परिक्रमा भक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। भक्त 21 किमी की परिक्रमा में दंडवत करते हैं कुछ तो करोड़ों बार दंडवत करने का संकल्प लेते हैं। एक साधक बुद्धि भगत एक ही स्थान पर 1161 बार दंडवत करते हैं। रूप किशोर शर्मा जैसे वृद्ध भी भक्ति में लीन हैं।

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    गिरिराजजी की कठिनतम साधना है दंडवती परिक्रमा

    रसिक शर्मा, गोवर्धन (मथुरा)। कलियुग में भक्ति के अनुपम उदाहरणों में एक, गिरिराज जी की दंडवती परिक्रमा, आज भी श्रद्धा और साधना का अद्वितीय संगम बनी हुई है। गोवर्धन पर्वत की 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है, जहां नंगे पैर चलने वालों से लेकर दो करोड़ से अधिक बार दंडवत करने का संकल्प लेने वाले संत तक अपनी भक्ति की पराकाष्ठा का परिचय दे रहे हैं। 

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    गिरिराजजी की शरण में श्रद्धालु शरीर की नहीं, आत्मा की शक्ति के साथ चलते हैं। दंडवती परिक्रमा केवल शारीरिक परिश्रम नहीं, यह आत्म समर्पण की पराकाष्ठा है। यह पर्वतराज की भक्ति का वह स्वरूप है जहां मौन, निशान और नमन ही संवाद बन जाते हैं।

    1161 निशानों की मौनी साधना

    भक्ति की पराकाष्ठा देखनी हो तो गिरिराज परिक्रमा में एक मौन साधक बुद्धि भगत को देखें, जो एक ही जगह 1161 बार दंडवत कर अगला कदम बढ़ाते हैं। यह साधना पूर्ण करने तक करीब 2 करोड़ 85 लाख 3 सौ बार दंडवत की आवश्यकता होगी। जब उनसे बातचीत का प्रयास किया गया, तो उन्होंने सिर्फ जमीन पर 1161 लिखकर अपनी साधना की गहराई बता दी।

    भक्ति में डूबे वृद्ध, युवा और साधक

    पूर्व स्वास्थ्य पर्यवेक्षक रूप किशोर शर्मा (71) अब तक 21 और 42 निशान की दंडवती पूर्ण कर चुके हैं, और फिलहाल 131 निशान के संकल्प के साथ हर दिन चार कदम की दंडवत यात्रा कर रहे हैं। वहीं राजाराम दास और नंदराम जैसे साधक 108 निशानों की परिक्रमा में लीन हैं।

    दंडवत परिक्रमा: कठिनतम साधना

    गिरिराज पर्वत की 21 किमी परिक्रमा सामान्यतः पैदल 7 से 8 घंटे में पूर्ण होती है, लेकिन दंडवत परिक्रमा में यह दूरी साधकों को सप्ताहों में तय करनी पड़ती है। गोवर्धन की रहने वाले लव कृष्ण ने इस परिक्रमा में प्रत्येक दंडवत पर एक-एक रुपये के सिक्के रखे और अंत में 17,300 रुपये का योग आया, यह दर्शाता है कि एक पूरी परिक्रमा में औसतन 17,300 बार दंडवत करना होता है।

    भक्ति के विविध रूप: ऐसे लगती हैं परिक्रमाएं

    • पैदल परिक्रमा: सर्वाधिक आम परिक्रमा। भक्त नंगे पांव गिरिराज जी की 21 किमी की परिक्रमा पूरी करते हैं। यह सात से आठ घंटे में पूर्ण होती है।
    • दुग्धाधार परिक्रमा: भक्त मिट्टी के बर्तन में दूध भरकर चलते हैं, बर्तन में छेद कर उसमें कुशा डाली जाती है जिससे लगातार दूध की धार गिरती रहती है। इसमें गिरिराज को लगभग 40-45 लीटर दूध अर्पित किया जाता है।
    • धूप परिक्रमा: धूप-धूनी और हवन सामग्री सुलगाकर वातावरण को शुद्ध करते हुए की जाती है यह परिक्रमा। कुछ श्रद्धालु अगरबत्तियों के साथ भी यह परिक्रमा पूर्ण करते हैं।