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मिठाइयों पर नकली वर्क: आपकी सेहत के लिए धीमा जहर, त्योहारी सीजन में रहें सतर्क

Published: Sun, 01 Nov 2026 08:40 PM (IST)

मिठाइयों पर लगे नकली वर्क से स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है, क्योंकि महंगे सोने-चांदी के बजाय दुकानदार एल्युमिनियम और कैडमियम जैसे हानिकारक तत्वों का प्रयोग कर रहे हैं।

मथुरा: काजू से बनी मिठाई पर चढ़ा चांदी का बरक। फोटो सौ. इंटरनेट मीडिया

मथुरा: काजू से बनी मिठाई पर चढ़ा चांदी का बरक। फोटो सौ. इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. नकली वर्क में एल्युमिनियम, कैडमियम की मिलावट।

  2. लिवर, किडनी और कैंसर का खतरा बढ़ाता।

  3. त्योहारी सीजन में नकली वर्क का अधिक प्रयोग।

जागरण संवाददाता, मथुरा। अगर आप सोना-चांदी के वर्क की मिठाई खा रहे हैं तो जरा ठहरें। पहले यह देख लें कि मिठाई पर लगा वर्क असली है या नकली। सोना-चांदी की कीमतों में उछाल के बाद कई दुकानदार असली के बजाय नकली वर्क का प्रयोग कर रहे हैं। ये असली वर्क की अपेक्षा कई गुणा सस्ता होता है। ये एक तरह से मीठा जहर है, जो आपको बीमार कर सकता है।

दीपोत्सव पर कई कुंतल मिठाई की खपत होती है। ऐसे में विशेष मिठाइयों पर प्रयोग होने वाले चांदी के वर्क भी नकली आ रहे हैं। अब जबकि त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लग रही है।

धीमा जहर साबित हो सकती हैं मिठाइयां

काजू कतली, बर्फी और अन्य शादियों व उत्सवों की विशेष मिठाइयों पर चमकता हुआ चांदी का वर्क उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा देता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि मिठाइयों की यह चमक आपकी सेहत के लिए धीमा जहर साबित हो सकती है।

मौजूदा समय शुद्ध चांदी की करीब 1.95 लाख रुपये प्रति किलोग्राम और सोने का भाव भी करीब डेढ़ लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास चल रहा है। कीमती धातुओं के इन रिकार्ड तोड़ दामों के चलते मिठाई बाजार में मुनाफाखोरों ने चांदी और सोने के नाम पर खतरनाक और सस्ते विकल्पों का खुला खेल शुरू कर दिया है।

खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार खाद्य पदार्थों पर शुद्ध चांदी या सोने का ही वर्क लगाया जाना चाहिए, जो कि तय मानकों के तहत शरीर के लिए सुरक्षित हो। परंतु, मौजूदा महंगे दामों के कारण मुनाफा कमाने की होड़ में मिलावटखोर असली धातुओं के बजाय सस्ते और हानिकारक तत्वों का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं।

 99.9 प्रतिशत शुद्ध चांदी का बना होना चाहिए वर्क

  • चांदी का वर्क: काजू कतली, बर्फी, सोनपापड़ी और कई अन्य पारंपरिक भारतीय मिठाइयों पर सबसे ज्यादा चांदी के वर्क का उपयोग होता है। नियम के अनुसार, यह कम से कम 99.9 प्रतिशत शुद्ध चांदी का बना होना चाहिए।
  • सोने का वर्क: बहुत महंगी, शाही या विशेष आयोजन (शादी या त्योहार) पर बनाई जाने वाली मिठाइयों पर खाने योग्य सोने का वर्क भी लगाया जाता है। आम दुकानों पर सोने का वर्क मिठाई की दुकानों पर कम ही होता है। लेकिन, सोने के वर्क का प्रयोग बहुत ही कम होता है।

नकली वर्क पहुंचाते लिवर-किडनी को नुकसान: डाॅ. मनोज

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनोज कुमार बताते हैं नकली वर्क स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता। लैब की जांच में चांदी के नकली वर्क में 99 प्रतिशत तक एल्युमिनियम और कैडमियम पाया गया है। इसी तरह सोने के वर्क के नाम पर तांबे और जिंक (जस्ता) की मिलावट पाए जाने की जानकारी सामने आई है। ये लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके कारण कैंसर एवं पेट की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

हमारे पास चांदी का असली वर्क ही मिलता है। लोकल वर्क भी बाजार में उपलब्ध है। चांदी तीन लाख थी, उस समय 150 पीस के पैकेट की कीमत 1500 रुपये थी। अब सस्ती होने पर 1250 रुपये में उपलब्ध है।

-कुनाल, दुकानदार, कोकाराम पंसारी, कोतवाली मार्ग।

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