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पांच सौ सालों में पहली बार बांकेबिहारी को नहीं लगा बालभोग, टूटी परंपरा

By Prateek GuptaEdited By: Prateek Gupta
Published: Mon, 15 Dec 2025 11:25 AM (IST)

मथुरा के Banke Bihari Temple में ठाकुरजी को बालभोग नहीं मिला, जिससे मंदिर की परंपरा पहली बार टूटी। सेवायतों का ...और पढ़ें

Banke Bihari Mandir: सोमवार सुबह ठाकुरजी को भोग नहीं लगा।

Banke Bihari Mandir: सोमवार सुबह ठाकुरजी को भोग नहीं लगा।

जागरण संवाददाता, वृंदावन। दुनिया के पालनहार स्वामी ठाकुर बांकेबिहारी सोमवार को दर्शन देने को बैठे, लेकिन उनके चेहरे पर प्रतिदिन की तरह भाव नजर नहीं आ रहे थे। भक्तों को लगा जैसे वह कह रहे हों कि यशोदा मैया, तेरा लाला भूखा है। जिनको कलेऊ की जिम्मेदारी दी थी उन्होंने सोमवार सुबह मेरी ओर देखा भी नहीं। मुझ बालक को तो सुबह कलेऊ (बालभोग) चाहिए। मैं किसकी गलती या अहम को दोष दूं, क्योंकि सब कह देते हैं कि ये तो लाला की ही लीला है। मैया सच जान, पांच सौ वर्ष में पहली बार मैंने ऐसी सुबह देखी है, जब कलेऊ नहीं मिला।

लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व प्रकट हुए ठाकुर बांकेबिहारी को चार पहर भोग लगाया जाता है। सुबह दर्शन के लिए आसन लगाने से पहले बालभोग लगता है। दोपहर में मंदिर बंद होने से पहले राजभोग और शाम को पट खुलने पर उत्थापनभोग लेते हैं। पट बंद होने पर शयनभोग लगाया जाता है। भोग बनाने के लिए हलवाई को ठेका दिया जाता है। हलवाई भोग बनाकर सेवायतों को देते हैं और वे भोग लगाते हैं। पहले मंदिर प्रबंधन एक हलवाई से भोग बनवाता था, लेकिन अक्टूबर में हलवाई ने काम छोड़ दिया।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर प्रबंधन के लिए गठित उच्चाधिकार प्रबंधन समिति ने मयंक गुप्ता को ठेका दिया। सोमवार को सुबह पौने नौ बजे मंदिर के पट खुले, लेकिन हलवाई बालभोग लेकर नहीं पहुंचे। मयंक से संपर्क किया गया तो पता चला मासिक भुगतान न होने के कारण हलवाई नहीं पहुंचे। इससे बाद भुगतान का वादा कर हलवाई बुलाए गए।

उच्चाधिकार प्रबंधन समिति के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि राजभोग से कुछ देर पहले ठाकुर जी को बालभोग लगाया गया। पूर्व में मैंने ठेकेदार को 50 हजार रुपये दिए थे। सेवायत शैलेंद्र गोस्वामी का कहना है कि मंदिर के स्थापना के पहली बार बालभोग नहीं लगा है।

90 हजार रुपये प्रतिमाह में बनता बालभोग

मयंक का कहना है कि चार पहर भोग के लिए 90 हजार रुपये प्रतिमाह में ठेका मिला था। मैंने 15 अक्टूबर से जिम्मेदारी संभाली। पांच नवंबर को बताया गया कि आज से ठेका शुरू माना जाएगा। मैंने 15 अक्टूबर से चार नवंबर तक का 63 हजार व नवंबर का बिल 75 हजार दिया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ है। इसलिए हलवाई नहीं पहुंचे। 

भगवान के आराम के समय प्रभावशाली लोगों को विशेष पूजा कराने पर सुप्रीम कोर्ट नाखुश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में प्रभावशाली लोगों को विशेष पूजा की अनुमति दिए जाने से भगवान के विश्राम में खलल पड़ने पर सोमवार को नाराजगी जताई। सुनवाई कर रहे प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि वे देवता को आराम कहां करने देते हैं, उस समय प्रभावशाली लोगों को विशेष पूजा कराई जाती है।

कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से दर्शन के समय में बदलाव पर आपत्ति उठाते हुए बहस की जा रही थी। हालांकि, कोर्ट ने ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज मंदिर प्रबंधन समिति की याचिका पर कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति और यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिका में उच्चाधिकार प्राप्त समिति के कुछ फैसलों को चुनौती दी गई है, जिसमें मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाना और देहरी पूजा पर रोक शामिल है। मामले में अदालत जनवरी के पहले सप्ताह में फिर सुनवाई करेगी। सोमवार को यह मामला प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए लगा था।

याचिकाकर्ता के वकील श्याम दीवान ने दर्शन के समय में बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दर्शन-पूजन का समय लंबी परंपरा का हिस्सा है। समय में बदलाव मंदिर के रीति-रिवाजों में बदलाव के समान है। जब दीवान ये दलीलें दे रहे थे, तभी प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि 12 बजे दोपहर में मंदिर बंद होने के बाद वो क्या करते हैं। देवता को कहां आराम करने देते हैं। उन्हें जमकर परेशान करते हैं। जो लोग प्रभावशाली हैं, ज्यादा पैसा दे सकते हैं उन्हें विशेष पूजा की अनुमति दी जाती है।