Baladau Janmotsav: ब्रज के राजा बलदाऊ ने दिए दर्शन, रोहिणी जायो लल्ला; मच गयो ब्रज में हल्ला
बलदेव में दाऊजी महाराज के जन्मोत्सव पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह 4 बजे दाऊजी और रेवती मैया का अभिषेक हुआ जिसके बाद मंगला दर्शन हुए। 108 ब्राह्मणों ने बलभद्र सहस्त्रनाम का पाठ किया और पंचामृत अभिषेक हुआ। भक्तों ने आभूषणों से सजे दाऊजी के दर्शन किए और नंदोत्सव मनाया गया जिसमें प्रसादी बांटी गई। क्षीरसागर कुंड में सेहरा विसर्जित करने की भी परंपरा निभाई गई।

अनुज उपमन्यु, जागरण, बलदेव। अतुलनीय आभा, अद्भुत शृंगार और अवर्णनीय माहौल। भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ महाराज के जन्मोत्सव पर ब्रज में कुछ ऐसा ही नजारा है। बलदेव के दाऊ जी मंदिर में सुबह आराध्य के प्राकट्योत्सव पर भक्ति का समंदर उमड़ा। मंदिर परिसर जयकारों से गूंजा। दिव्य हीरा जवाहरात धारण कर जब दाऊ जी ने दर्शन दिए तो मानो ब्रज में फिर बैकुंठ उतर आया। सुबह से आस्था की जो बयार बही, शाम तक समंदर में बदल गई।
भक्ति कुल के श्रेष्ठ आचार्य विद्रुमवनाधिपति प्रभु श्री दाऊजी महाराज के प्राकट्योत्सव का उल्लास दाऊ जी की नगरी में सुबह से ही छाया रहा। सुबह चार बजे दाऊजी महाराज व रेवती मैया का अभिषेक हुआ, तो हजारों श्रद्धालु इस पल का साक्षी बनने को पहुंच गए। मंगला दर्शन मिले तो आंखों को जो सुकून मिला, उसे शब्दों में बता बना मुश्किल है।
बलदाऊ के दर्शन में उमड़े श्रद्धालु, ब्रज में उतरा बैकुंठ
सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। घड़ी की सुई दोपहर के 12 बजा रही थी और मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से अटा। कुछ गूंज रहा था तो बस जयकारा। बलदाऊ का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी को हुआ था। मंदिर परिसर के एक कोने से गूंज रही शहनाई ने सबको बता दिया कि आज दाऊदयाल पधारे हैं। सुबह छह बजे ठाकुर जी ने शृंगार दर्शन दिए, तो सेवायत पांडेय समाज के पुरुष भी धोती और बगलबंदी पहनकर पहुंचने लगे। 108 ब्राह्मणों ने श्री बलभद्र सहस्त्रनाम का पाठ शुरू किया।
वेदपाठी ब्राह्मणों ने मंत्रोचारण के साथ सेवायत और विशेष पंडितों के बीच बलदेव के श्री विग्रह को पंचामृत अभिषेक कराया। इस अद्भुत पल का साक्षी बन आगरा की शिवानी की खुशी का ठिकाना नहीं था। लहंगा और चुन्नी में सजी शिवानी दाऊ जी महाराज की अद्भुत छवि को काफी देर तक निहारती रहीं। बोलीं, इससे अलौकिक कुछ नहीं। अलीगढ़ के शिवा भी 72 की उम्र में दंडवती देकर मंदिर परिसर पहुंचे। बोले, धन्य हो जाता हूं, ब्रज के राजा के दर्शन पाकर।
बलदाऊ ने आभूषण हीरा, पन्ना, जवाहरात, माणिक, बाजूबंद धारण कर दर्शन दिए
ग्वालियर की खुशबू भी भक्ति की सुगंध से महक उठीं। बलदाऊ ने दोपहर बाद आभूषण हीरा, पन्ना, जवाहरात, माणिक, बाजूबंद धारण कर दर्शन दिए। फिर गूंजा रोहिणी जायो लल्ला मचो है ब्रज हल्ला। ढोल,ढप, मजीरा के साथ समाज गायन यह बताने के लिए काफी है कि ब्रजवासी कितने प्रफुल्लित हैं।
श्री दाऊजी महाराज को मल्लयुद्ध दधिकांधा खेलने के लिए आमंत्रित किया गया। हल्दी,केसर,दही, मक्खन से बने मिश्रण लाला की छीछी स्वरूपी प्रसादी सेवायतों व भक्तों पर फेंकी गई। मंदिर की छत से नारियल, फल मेवा, नोट लुटाकर नंदोत्सव मना। ठाकुर जी को भांग भोग के साथ ही 11 कुंतल लड्डू का भोग लगा।
क्षीर सागर में सेहरे का विसर्जन
बलदेव छठ पर दूल्हे का सेहरा क्षीर सागर में विसर्जित करने की परंपरा है। माता-पिता अपने पुत्र की शादी के ठीक एक वर्ष बाद बलदेव स्थित क्षीरसागर कुंड में सेहरा विसर्जित करते हैं। शुक्रवार को हजारों लोगों ने सेहरा विसर्जित किया।
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