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वात्सल्य ग्राम की माताएं: जन्म नहीं दिया लेकिन यशोदा बनकर निभा रही मां का धर्म, अहोई अष्टमी पर बच्चों के लिए रखेंगी व्रत

Published: Sun, 01 Nov 2026 08:05 AM (IST)

वृंदावन के वात्सल्य ग्राम में 'मां यशोदा' बनकर बच्चों का पालन-पोषण कर रहीं महिलाएं अहोई अष्टमी पर उनकी लंबी उम्र ...और पढ़ें

मथुरा में व्रत रखने वाली मां।

मथुरा में व्रत रखने वाली मां।

HighLights

  1. वात्सल्य ग्राम में 'मां यशोदा' बच्चों के लिए व्रत रखेंगी।

  2. अहोई अष्टमी पर बच्चों की दीर्घायु, खुशहाली की कामना।

  3. जन्म न देकर भी ममता से पाल रहीं 148 बच्चे।

संवाद सहयोगी, वृंदावन (मथुरा)। मां की ममता का कोई मोल नहीं होता। यह न खून का रिश्ता देखती है और न जन्म का बंधन। वात्सल्य ग्राम में ऐसी ही ममता की अनूठी तस्वीर देखने को मिलती है। यहां मां यशोदा बनकर बच्चों को पाल रहीं महिलाएं भले ही उनकी जन्मदात्री नहीं हैं, लेकिन उनके लिए हर सुख-दुख में ढाल बनकर खड़ी हैं।

बच्चों की मुस्कान में अपनी खुशी तलाशने वाली ये मां यशोदा अब अहोई अष्टमी पर उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। रविवार को दिनभर अन्न-जल त्यागकर ये माताएं अपनी संतानों की सलामती की कामना करेंगी।

अहोई अष्टमी पर बच्चों की दीर्घायु और खुशहाली के लिए करेंगी उपवास

वृंदावन स्थित वात्सल्य ग्राम में ऐसे बच्चों को परिवार का स्नेह मिलता है, जिन्हें जीवन की शुरुआत में अपनों का साथ नहीं मिला। संस्थापक साध्वी ऋतंभरा ने यहां गोकुलम परिवार व्यवस्था के माध्यम से उन्हें मां, मौसी और नानी का रिश्ता दिया है। हर परिवार में मां यशोदा बच्चों के पालन-पोषण से लेकर उनकी शिक्षा और संस्कारों तक की जिम्मेदारी निभाती हैं। समय के साथ इन रिश्तों में इतना अपनापन घुल गया है कि बच्चों की चिंता और उनकी खुशियां ही इन माताओं की दुनिया बन गई हैं।

चांदी की माला के मोतियों में पिरोया है हर संतान से जुड़ा वात्सल्य

वात्सल्य परिवार की मुखिया सुमनलता परमानंद बताती हैं कि वह 20 वर्ष से यहां रह रही हैं। उनके परिवार में सात बच्चे हैं, जिनमें चार बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़ा बेटा शाश्वत 26 वर्ष का है और नौकरी कर रहा है। वह हर वर्ष बच्चों की दीर्घायु के लिए अहोई अष्टमी का निर्जला व्रत रखती हैं। साधिका परमानंद वर्ष 2004 में वात्सल्य ग्राम आई थीं। उनके परिवार में छह बेटियां और एक बेटा है। वह कहती हैं कि बच्चों के साथ रहते हुए कभी घर से दूर होने का अहसास नहीं हुआ। सभी बड़े होकर एक-दूसरे का सहारा बन रहे हैं।

साथी परमानंद वर्ष 2005 से यहां हैं। उनके परिवार में दस बच्चे हैं। वह भी बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।

चांदी की माला में हर बच्चे के नाम का मोती

इन मां यशोदा के वात्सल्य का एक भावुक प्रतीक चांदी की माला भी है। प्रत्येक मां अपने बच्चों की संख्या के अनुसार माला में मोती पिरोती है। हर बच्चे के लिए दो मोती होते हैं। अहोई अष्टमी पर ये माताएं ध्रुव तारे को अर्घ्य देकर पूजन करेंगी। इसके बाद साध्वी ऋतंभरा के सान्निध्य में एक साथ व्रत खोलेंगी। ये मालाएं दीपावली तक धारण की जाती हैं।

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16 परिवारों में 148 बच्चों को मिल रहा परिवार

वात्सल्य ग्राम के प्रवक्ता डा. उमाशंकर राही के अनुसार, गोकुलम व्यवस्था के तहत 16 परिवारों में 148 बच्चे रह रहे हैं। प्रत्येक परिवार में मां, मौसी और नानी मिलकर बच्चों को स्नेह, शिक्षा और संस्कार देती हैं। यहां सभी त्योहार पूरे विधि-विधान और पारिवारिक उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। अहोई अष्टमी पर भी सभी माताएं अपने पाल्यों की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना के साथ निर्जला व्रत रखेंगी।

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