180 साल पुराना गरुड़ स्तंभ नए रूप में चमकेगा, वृंदावन के रंगजी मंदिर में सोने के स्तंभ का जीर्णोद्धार
वृंदावन के रंगजी मंदिर में 180 साल पुराने, 60 फीट ऊंचे और 25 किलो वजनी सोने के गरुड़ स्तंभ का ...और पढ़ें

गरुड़ स्तंभ।
HighLights
रंगजी मंदिर में 180 साल पुराने गरुड़ स्तंभ का जीर्णोद्धार।
दक्षिण भारतीय आचार्यों ने बालालय अनुष्ठान संपन्न किया।
कारीगर सोने की परत चढ़ाकर स्तंभ को नया रूप देंगे।
संवाद सहयोगी, वृंदावन (मथुरा)। रामानुज संप्रदाय में भगवान विष्णु के दिव्य देशों में गरुड़ स्तंभ का विशेष महत्व है। रंगजी मंदिर में गर्भगृह के सामने प्रांगण में सोने का गरुड़ स्तंभ की स्थापना मंदिर निर्माण के साथ 180 वर्ष पहले हुई। अब इसकी चमक मंद पड़ी तो प्रबंधन ने पुनरुद्धार का संकल्प लिया है। इससे पहले मंदिर में दक्षिण भारतीय आचर्याें द्वारा बालालय अनुष्ठान करवाया, जिसमें एक दिन का ब्रह्मोत्सव हुआ और तीन दिवसीय अनुष्ठान के बाद गरुड़ स्तंभ में मौजूद शक्तियों को एक चित्र में समाहित किया, ताकि नियमित पूजा हो सके।
वृंदावन के रंगजी मंदिर में वैदिक अनुष्ठान का चल रहा तीन दिन से काम
दक्षिण भारतीय परंपरा का रंगजी मंदिर सोने के खंभे के नाम से भी प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में गरुड़ स्तंभ (सोने का खंभा) स्थापित है। रामानुज संप्रदाय के दिव्यदेशों में गरुड़ स्तंभ की मान्यता अधिक है। किसी भी धार्मिक कार्य की शुरूआत इसी गरुड़ स्तंभ से होती है। मंदिर निर्माण के समय स्थापित गरुड़ स्तंभ का स्वरूप कुंद पड़ गया तो इसे मंदिर महांत स्वामी गोवर्धन रंगाचार्य ने नया रूप देने का निर्णय लिया है।
चूंकि स्तंभ देव रूप में प्रतिष्ठित है, इसलिए इस स्तंभ की शक्तियां एक चित्रपट में उतारने का विधान चल रहा है। सोमवार को ये पूरा हो जाएगा, उसके बाद इसे नया रूप देने का काम शुरू हो जाएगा।
दक्षिण भारत से आए कारीगर
स्तंभ को नया रूप देने के लिए पौन्नूर से लक्ष्मी नरसिंहम सात कारीगरों समेत आए हैं। बताया, मंगलवार से स्तंभ के पुनरुद्धार का काम शुरू होगा। अंदर की लकड़ी को भी बदला जाएगा। इसके बाद सोने की परत चढ़ाने का काम होगा।
इस कार्य के लिए पहले दिन स्तंभ का पूजन हुआ। शनिवार को एक दिन का ब्रह्मोत्सव मनाया गया। ताकि ब्रह्मोत्सव की तिथि बढ़ने पर कोई दिक्कत न हो। अनुष्ठान पूरा होने पर स्तंभ की ध्वजा उतारी जाएगी और फिर इसकी पूजा चित्र में ही नियमित रूप से होगी। इसके बाद पुनरुद्धार का काम चलेगा।
राजू स्वामी, मंदिर पुजारी।
60 फीट ऊंचा स्तंभ 30 फीट नीचा स्तंभ है। अंदर लकड़ी, इसके ऊपर तांबा और सबसे ऊपर सोने का वर्क है। 180 वर्ष पहले 18 परत का सोने का वर्क स्तंभ में लगाया गया। इसका भार लगभग 25 किलो था। पुनरुद्धार में सात किलो सोना लगने का अनुमान है।
अनघा श्रीनिवासन, सीईओ, रंगजी मंदिर।
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