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Mainpuri By Election: मुलायम से भी आगे निकला डिंपल की जीत का आंकड़ा, सभी विधानसभा क्षेत्रों में एकतरफा पड़े वोट

मुलायम सिंह खुद भी कभी इस सीट में शामिल पांचों विधानसभा क्षेत्राें में जीत हासिल नहीं कर पाते थे परंतु डिंपल यादव यह चमत्कार कर गढ़ की ‘महारानी’ बन गईं। मैनपुरी लोकसभा सीट को सपा का गढ़ कहा जाता है। सपा का गठन भले ही वर्ष 1992 में हुआ परंतु मुलायम सिंह यादव के राजनीति में उभार की साथ ही यहां उनका वर्चस्व बन गया था।

By Shivam YadavEdited By: Shivam YadavPublished: Thu, 08 Dec 2022 06:39 PM (IST)Updated: Thu, 08 Dec 2022 06:39 PM (IST)
Mainpuri By Election: मुलायम से भी आगे निकला डिंपल की जीत का आंकड़ा, सभी विधानसभा क्षेत्रों में एकतरफा पड़े वोट
मुलायम का यह गढ़ ढहाना भाजपा के लिए अभी बहुत दूर की कौड़ी है।

मैनपुरी [दिलीप शर्मा]: मैनपुरी लोकसभा सीट पर गुरुवार को संपन्न हुए उपचुनाव में सपा उम्मीदवार डिंपल यादव ने 2.88 लाख मतों से ज्यादा के अंतर से प्रचंड जीत हासिल की है। मैनपुरी सीट पर मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पुत्रवधू डिंपल यादव ने परिवार की राजनीतिक विरासत को बरकरार रखा ही, साथ ही जीत का नया कीर्तिमान भी गढ़ दिया। यह भी प्रमाणित कर दिया कि मुलायम का यह गढ़ ढहाना भाजपा के लिए अभी बहुत दूर की कौड़ी है। क्योंकि मुलायम सिंह का अखाड़ा कहे जाने वाले इस क्षेत्र के चुनाव में डिंपल की जीत उनसे भी आगे निकल गई। 

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मुलायम सिंह खुद भी कभी इस सीट में शामिल पांचों विधानसभा क्षेत्राें में जीत हासिल नहीं कर पाते थे, परंतु डिंपल यादव यह चमत्कार कर गढ़ की ‘महारानी’ बन गईं। मैनपुरी लोकसभा सीट को सपा का गढ़ कहा जाता है। सपा का गठन भले ही वर्ष 1992 में हुआ, परंतु मुलायम सिंह यादव के राजनीति में उभार की साथ ही यहां उनका वर्चस्व बन गया था। उनके समर्थन या पार्टी वाले प्रत्याशी ही सांसद बनते रहे।

मुलायम को मोदी लहर में मिली थी प्रचंड जीत

सपा के गठन के बाद मुलायम सिंह यादव खुद वर्ष 1996 में मैदान उतरे और सांसद बने। इसके बाद से सपा यहां अजेय रही है। वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में जब भाजपा को मोदी लहर में प्रचंड जीत मिली थी, तब भी मुलायम सिंह यादव का गढ़ बरकरार रहा था। 

भाजपा ने लगाई पूरी ताकत

मुलायम सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा इस गढ़ को ढहाने के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतरी थी। भाजपा ने शाक्य प्रत्याशी के रूप में रघुराज सिंह शाक्य को मैदान में उतारा था। दूसरी तरफ सपा अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी डिंपल यादव को प्रत्याशी बनाया। अखिलेश, डिंपल और उनके पूरे परिवार ने नेताजी की विरासत को बचाए रखने के लिए दिन-रात पसीना बहाया। लोकसभा क्षेत्र की जनता की सहानुभूति का उनकाे पूरा साथ मिला। ऐसे में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। 

एकतरफा वोटों की बारिश, 288461 वोटों से जीतीं

गुरुवार को जब मतगणना आरंभ हुई तो ईवीएम ने यह साक्ष्य देना शुरू कर दिया कि सपा का गढ़ बरकरार रहेगा। डिंपल यादव पहले राउंड से ही भाजपा प्रत्याशी से आगे निकल गईं। इसके बाद हर राउंड की गिनती में बढ़त का आंकड़ा बढ़ता चला गया। भाजपा प्रत्याशी कभी भी मुकाबले में नजर नहीं आया। अंत में डिंपल यादव ने 618128 कुल मत प्राप्त किए, जबकि भाजपा प्रत्याशी को कुल 329659 मत मिले। डिंपल यादव को 288461 मतों की बढ़त से विजय प्राप्त हुई। 

इस तरह बना नया कीर्तिमान

मैनपुरी लोकसभा सीट पर सपा का वर्चस्व भले ही रहा हो, परंतु पूर्व के किसी भी चुनाव में सपा का कोई भी प्रत्याशी सभी विधानसभा क्षेत्रों से बढ़त नहीं ले सका था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में खुद मुलायम सिंह यादव भोगांव विधानसभा क्षेत्र से 26 हजार वोटाें से पिछड़ गए थे। भोगांव क्षेत्र से हर बार भाजपा ही बढ़त पा रही थी। 

वहीं पिछले चुनाव में भाजपा ने मैनपुरी लोकसभा सीट से भी बढ़त प्राप्त की थी। परंतु इस चुनाव में डिंपल यादव की ऐसी आंधीा चली कि भाजपा का सबसे मजबूत भोगांव विधानसभा क्षेत्र भी नहीं बच सका। डिंपल ने भोगांव से मतों और मैनपुरी से मतों की बढ़त ली। यह लोकसभा सीट के इतिहास में पहली बार हुआ है।

किस प्रत्याशी को मिले कितने वोट

प्रत्याशी, पार्टी, कुल मत मिले 

डिंपल यादव, सपा, 618128

रघुराज सिंह शाक्य, भाजपा, 329659

प्रमोद कुमार यादव, भारतीय कृषक दल, 3801

भूपेंद्र कुमार धनगर, राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी, 

3137 सुरेश चंद्रा, निर्दलीय, 2303

सुषमा देवी, निर्दलीय, 2409

जीत के बड़े कारण

  • मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण मिली सहानुभूति।
  • शिवपाल यादव और अखिलेश यादव का एक साथ आना।
  • अखिलेश यादव व पूरे परिवार का गांव-गांव प्रचार।
  • हर जाति-वर्ग के मतदाताओं से संपर्क-संवाद।
  • वोट के रूप में नेताजी को श्रद्धांजलि देने की अपील।
  • मतदाताओं को बूथ तक लाने की रणनीति।

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