Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    होटल-रेस्टोरेंट में खप रही मीना-शालिनी की गैस, मैनपुरी में घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी का खुलासा

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 10:12 AM (IST)

    मैनपुरी में घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी का खुलासा हुआ है। होटल, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड स्टालों में घरेलू सिलेंडर इस्तेमाल हो रहे हैं। एजेंसी और विभाग की मिलीभगत से यह अवैध कारोबार चल रहा है, जिसमें उपभोक्ता और हाकर भी शामिल हैं। जिला पूर्ति अधिकारी ने कार्रवाई की बात कही है।

    Hero Image

    दुकानों पर घरेलू गैस सिलेंडर।

    जागरण संवाददाता, मैनपुरी। सिर्फ शालिनी और मीना ही नहीं, सैकड़ों उपभोक्ता के घरेलू गैस सिलिंडर का दुरुपयोग रेस्टोरेंट, हाेटल, ढाबा और फास्ट फूड सेंटर पर हो रहा है। एजेंसी एवं उपभोक्ताओं की साठ-गांठ और विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण घरेलू सिलिंडर की कालाबाजारी का खेल जिले में खूब चल रहा है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    कमर्शियल की बजाय घरेलू सिलेंडर से धधकाई जा रही होटल-रेस्टोरेंट व फास्ट फूड स्टॉल की भट्ठी

    विभाग व एजेंसी से मिले अनुमानित आंकड़े के अनुसार जिले में 30 एजेंसी से लगभग 4.30 लाख से ज्यादा उपभोक्ता जुडे हैं जो घरेलू सिलिंडर खरीदते हैं। वहीं, व्यावसायिक उपभोक्ताओं की बात करें तो लगभग छह हजार ने ही कमर्शियल सिलिंडर ले रखे हैं। छोटी-बड़ी मिलाकर जिले में 20 हजार से ज्यादा खाद्य सामग्री की दुकान हैं। ज्यादातर के यहां घरेलू सिलिंडर ही जल रहे हैं।

    कार्रवाई नहीं की ग

    कागजों में भले ही घरेलू सिलेंडर की संख्या उपभोक्ताओं की संख्या के अनुसार सीमित है, लेकिन व्यावसायिक कारोबार में इनकी अनाधिकृत बिक्री का खेल एजेंसियों के माध्यम से ही हो रहा है। इसके विरुद्ध जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय के माध्यम से अब तक कोई कार्रवा नहीं कराई गई।

    केस एक : राजीव गांधी नगर निवासी मीना देवी के नाम पर घरेलू गैस सिलिंडर जारी है, लेकिन उनके नाम की गैस कचहरी रोड पर सड़क किनारे संचालित फास्ट फूड सेंटर पर जलती है।

    केस दो : मुहल्ला देवपुरा निवासी शालिनी देवी के नाम पर स्वीकृत घरेलू सिलिंडर भी राधारमन रोड पर सड़क किनारे फास्ट फूड के ठेल पर अक्सर उपयोग होता रहता है।

    लालच में उपभोक्ता और हाकर कराते कालाबाजारी

    एक हॉकर ने बताया कि 14 किग्रा की क्षमता वाले घरेलू सिलिंडर में खत्म होने पर भी एक से दो किग्रा गैस रहती है। वे ऐसे सिलिंडरों से गैस को खाली कर दूसरे में भर देते हैं और 950 रुपये में दुकानदार को बेच देते हैं। प्रतिदिन ऐसे लगभग 50 सिलिंडर एक एजेंसी से निकल जाते हैं। कई ग्राहक भी सिलिंडर की कालाबाजारी करते हैं। 876 रुपये में सिलिंडर लेकर वे दुकानदारों को एक हजार रुपये में आसानी से बेच देते हैं। कई हाकर तो सिलिंडर आपूर्ति से पहले ही उनसे गैस की चोरी कर लेते हैं।


     
    एक नजर में जिले की स्थिति

     

    • 30 गैस एजेंसी का जिले में संचालन हो रहा है।
    • 09 भारत पेट्रोलियम की हैं।
    • 04 हिंदुस्तान पेट्रोलियम की हैं।
    • 17 इंडेन से संबंधित हैं।
    • 4.30 लाख से ज्यादा उपभोक्ता हैं।


    कंपनियों का भी भरपूर दबाव

    इस अनाधिकृत कारोबार के लिए पेट्रोलियम कंपनियां भी जिम्मेदार हैं। एक एजेंसी संचालक ने बताया कि कंपनियों द्वारा ज्यादा कारोबार का दबाव बनाया जाता है। ऐसे में वे सिर्फ सिलिंडर बेचने पर ध्यान देते हैं। घरेलू और कामर्सियल देखने का समय ही नहीं मिलता।



    नोडल अधिकारियों ने नहीं की जांच

    हर पेट्रोलियम कंपनी द्वारा जिले में अपना प्रतिनिधि तैनात कर रखा है। उन्हें नोडल भी बनाया गया है, लेकिन प्रतिनिधियों के माध्यम से कभी भी घरेलू गैस सिलिंडर की कालाबाजारी को लेकर सत्यापन नहीं कराया गया। इस बात की भी जांच नहीं की गई कि रेस्टोरेंट या होटल पर संचालित सिलिंडर किनके नाम पर स्वीकृत है?



    व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर घरेलू गैस सिलिंडर का प्रयोग गलत है। बार-बार कहने के बावजूद एजेंसी संचालकों द्वारा कामर्सियल सिलिंडर का डाटा उपलब्ध नहीं कराया गया है। नियमत: घरेलू सिलिंडर का व्यावसायिक उपयोग करने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी कराई जाती है। अभियान चलाकर मनमानी करने वालों को पकड़ा जाएगा। यदि किसी उपभोक्ता के नाम का सिलिंडर मिलेगा तो भी जांच होगी। - रमन मिश्रा, जिला पूर्ति अधिकारी।