महोबा में ऐतिहासिक धरोहर पर चोरों की नजर; मंगलगढ़ किले की रियासतकालीन तोप को आरी से काट रहा था युवक, गोरखपुर का शातिर दबोचा
महोबा के ऐतिहासिक मंगलगढ़ किले में रियासतकालीन तोप चोरी करने का प्रयास विफल हो गया। गोरखपुर के एक युवक को ...और पढ़ें

तोप के आगे के हिस्से में चली आरी और पुलिस गिरफ्त में चोर। जागरण
HighLights
ग्राम खैरखुटा डुमरईया जिला गोरखपुर का निवासी है आरोपित
पालिका कर्मियों ने थाना चरखारी पुलिस को सौंपा, मुकदमा दर्ज
संवाद सहयोगी, चरखारी (महोबा)। उत्तर प्रदेश के महोबा स्थित ऐतिहासिक चरखारी कस्बे से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां धरोहर पर चोरों की नजर है। चोरी की नियत से ऐतिहासिक मंगलगढ़ दुर्ग की बेशकीमती रियासतकालीन तोप को आरी से काटते हुए एक युवक को रंगे हाथों पकड़ा गया है।
ऐतिहासिक मंगलगढ़ किले में शनिवार सुबह रियासतकालीन बेशकीमती तोप को काटकर चोरी करने का प्रयास नाकाम हो गया। गोरखपुर का युवक तोप को लगभग काट चुका था, तभी आवाज सुनकर पहुंचे सुरक्षा कर्मियों ने उसे दौड़कर पकड़ लिया।
सूचना पर पालिका कर्मी मौके पर पहुंचे और आरोपित को पुलिस को सौंप दिया। उसके कब्जे से तोप काटने के औजार, ब्लेड व आधार कार्ड बरामद हुआ है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर पूछताछ शुरू की है।
नगर पालिका चरखारी के लिपिक संजीत कुमार ने बताया कि शनिवार की सुबह कस्बा स्थित मंगलगढ़ किला में रखी रियासतकालीन बेशकीमती तोप को एक युवक चोरी करने के उद्देश्य से काट रहा था। जो लगभग इसे काट ही चुका था। तोप अष्टधातु की बताई जा रही है। इसे काटने की आवाज सुनकर वहां मौजूद सुरक्षा कर्मी मौके पर पहुंचे।
उसकी नजर लोगों पर पड़ी तो वह वहां से भागने लगा। लेकिन उसे दौड़कर पकड़ लिया गया। पूछने पर उसने अपना नाम रजनीकांत मिश्रा निवासी ग्राम खैरखुटा डुमरईया जिला गोरखपुर बताया। सूचना पर पालिका कर्मी पहुंचे और आरोपित को पकड़कर चरखारी थाने लाया गया।
थानाध्यक्ष चरखारी प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि छह होमगार्डों की ड्यूटी रहती है, आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। हो सकता है कि युवक किसी जगह के तार फेसिंग काटकर अंदर चला गया हो। मुकदमा दर्ज किया गया है। वह मानसिक रूप से कमजोर है, पूछताछ कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
चरखारी का मंगलगढ़ किला। जागरण
ये है किले का इतिहास
कस्बा चरखारी के ऐतिहासिक किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में महाराजा छत्रसाल के द्वितीय बेटे महाराजा जगतराज ने कराया था। चरखारी रियासत समाप्त होने के बाद यह किला जिला पंचायत हमीरपुर की आधिपत्य में था। उस समय भी पर्यटकों का आवागमन रहा। पिछले 30 वर्षों में रक्षा मंत्रालय के अधिग्रहण में होने पर यहां नागरिकों का प्रवेश प्रतिबंधित था। करीब छह माह पहले किला में तैनात रक्षा मंत्रालय के जवानों ने अपनी चौकी व सुरक्षा को हटाते हुए किला खाली कर दिया। किला खाली होते ही उसे देखने के लिए पर्यटक पहुंचने लगे लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते फिलहाल किले के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। तोप की लंबाई करीब 30 फिट है और युवक ने करीब ढाई से तीन फिट पीछे का हिस्सा काट दिया था। तोप अष्टधातु की बताई जा रही है।
