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    कंठेश्वर महादेव को दूर-दूर से आते हैं लोग पूजने

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 12 Aug 2021 06:52 PM (IST)

    जागरण संवाददाता महोबा शक्ति पीठ मां बड़ी चंद्रिका मंदिर परिसर में एक प्राचीन भगवान शिव क

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    कंठेश्वर महादेव को दूर-दूर से आते हैं लोग पूजने

    जागरण संवाददाता, महोबा : शक्ति पीठ मां बड़ी चंद्रिका मंदिर परिसर में एक प्राचीन भगवान शिव की सिद्ध प्रतिमा है। सावन माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं। रुद्राभिषेक, जलाभिषेक आदि भी किया जाता है। यहां स्थापित शिवलिग को कंठेश्वर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का महत्व इसलिए और बढ़ गया है क्यों ये चंद्रिका देवी मंदिर में परिसर में स्थित है।

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    इतिहास

    1950 में चंद्रिका मंदिर के बाहर कंठेश्वर महादेव की शिवलिग आकार की प्रतिमा बरगद के पेड़ के नीचे रखी थी। भक्तों ने प्रतिमा पर इतना सिदूर लगा दिया था कि वह पहचान में भी नहीं आ रही थी। मंदिर के पुजारी स्व. बलिहारी उपाध्याय को कुछ आभास हुआ। और उन्होंने सिदूर को साफ किया तो शिवलिग आकार में कंठेश्वर भगवान की प्रतिमा दिखी। और फिर पुजारी ने चंद्रिका देवी के बगल में ही एक मंदिर बनवा कर विधि विधान से भगवान भोलेबाबा के उस शिवलिग आकार की प्रतिमा को स्थापति करा दिया। तब से भगवान कंठेश्वर के प्रति श्रद्धलुओं का और भी महत्व बढ़ गया है। यहां भक्त प्रतिदिन पूजा अर्चना करन लगे। सबसे खास बात यह है कि कंठेश्वर भगवान बेलपत्र की छाया में स्थापित हैं। विशेषता

    भगवान कंठेश्वर भक्तों की हर इच्छा पूरी करते हैं। ये मंदिर में अपने आप में विशेष महत्व रखता है। चंद्रिका मंदिर आना वाला हर भक्त भगवान के आगे शीश झुकाता है और मन्नते मांगता है। सावन माह में यहां पर पूजा करने के लिए भक्तों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। प्रतिदिन भगवान कंठेश्वर की भव्य आरती की जाती है।

    भगवान कंठेश्वर के प्रति श्रद्धालुओं की बहुत आस्था है। सावन में प्रतिदिन विधिवत आराधना की जाती है। भगवान की चारों पहर आरती होती है। सावन में विशेष आयोजन भी होते रहते हैं। सुबह से दोपहर तक भारी भीड़ रहती है। शहर भर से भक्त अपनी आस्था प्रकट करने आते हैं।

    - राजबहादुर तिवारी, पुजारी

    भगवान कंठेश्वर का मंदिर विशेष फल देने वाला है। यहां पर सभी की मुरादें पूरी होती हैं। काफी पुरानी बात है एक व्यक्ति को कैंसर हो गया था। उसे डाक्टरों ने भी जवाब दे दिया था। थक हार कर उसने भगवान कंठेश्वर के सामने बैठकर 24 घंटे मंत्र का जाप किया और उसे राहत मिल गई थी। भगवान की यह बहुत सिद्ध प्रतिमा है। सबसे बड़ी खास बात ये है कि भगवान शंकर हमेशा बेलपत्र की छाया में रहते हैं।

    - मुकेश विकास गुप्ता, समाजसेवी