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सावधान! UP के ताल में तैर रही है मौत, इलाके में फैली दहशत; जानवरों के बाद इंसान भी बन रहे निवाला

Published: Mon, 19 Oct 2026 04:28 PM (IST)Updated: Mon, 19 Oct 2026 05:10 PM (IST)

महाराजगंज के सोहगीबरवा क्षेत्र में दर्जिनिया ताल से निकलकर मगरमच्छ नहरों और नारायणी नदी तक पहुँच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत है।

मगरमच्छ अब नहरों और नारायणी नदी तक पहुंचे

मगरमच्छ अब नहरों और नारायणी नदी तक पहुंचे

HighLights

  1. दर्जिनिया ताल से निकलकर नहरों तक पहुँचे मगरमच्छ।

  2. मगरमच्छों के हमले में एक व्यक्ति की मौत, पशु भी शिकार।

  3. ग्रामीणों ने तारबाड़ और रेस्क्यू की मांग की।

जागरण संवाददाता, महाराजगंज। सोहगीबरवा क्षेत्र के दर्जिनिया ताल से निकलकर मगरमच्छ अब नहरों और नारायणी नदी तक पहुंच रहे हैं। बाढ़ के दौरान पानी के साथ मगरमच्छों के आबादी के नजदीक पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। स्थिति यह है कि नहर किनारे पशु चराने और मछली पकड़ने जाने से लोग कतरा रहे हैं।

गेड़हवां गांव के आसपास टेलफाल नहर में घूम रहे मगरमच्छ ने 3 बकरियों और एक कुत्ते को भी निशाना बनाया है। वहीं, बीते 25 सितंबर और 5 अक्टूबर को मगरमच्छ के हमले में एक की जान चली गई। लगातार हो रही घटनाओं से क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से मगरमच्छ को पकड़कर दर्जिनिया ताल में छोड़ने और ताल के चारों ओर मजबूत तारबाड़ लगाने की मांग की है। लगातार 3 दिनों तक हुई वर्षा के बाद नारायणी नदी का जलस्तर बढ़कर 6 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था। इससे नदी के किनारे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

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शिकारपुर सहित आसपास के गांवों में पानी घुस गया था, जबकि गेड़हवा में भी कई घर बाढ़ की चपेट में आ गए थे। बाढ़ के पानी के फैलने से दर्जिनिया ताल से मगरमच्छों के बाहर निकलकर नहरों और नदी की ओर जाने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, दर्जिनिया ताल में ढाई सौ से अधिक मगरमच्छ हैं।

दो घटनाओं में गई एक की जान

25 सितंबर को गेड़हवां निवासी अख्तर अली शाम करीब सात बजे गंडक (नारायणी) नदी के टेलफाल कटहवा पुल के पास मछली पकड़ रहे थे। इसी दौरान झाड़ियों में छिपा मगरमच्छ अचानक पानी से बाहर निकला और उनके पैर को जबड़े में दबोच लिया। अख्तर के शोर मचाने पर आसपास के लोग पहुंचे तो मगरमच्छ उन्हें छोड़कर पानी में चला गया। हमले में अख्तर अली घायल हो गए।

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5 अक्टूबर को गेड़हवां निवासी छबिलाल उर्फ छांगुर नहर में मछली पकड़ने गए थे। इसी दौरान मगरमच्छ उन्हें पानी में खींचकर ले गया। एनडीआरएफ और वन विभाग की टीम ने तलाश अभियान चलाया। दूसरे दिन उनका शव बरामद हुआ। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में भय और बढ़ गया है।

तालाब में भी दिखा था मगरमच्छ

28 अगस्त को टोंगरी गांव के पोखरे में मगरमच्छ दिखाई देने से अफरा-तफरी मच गई थी। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ का रेस्क्यू कर उसे दर्जिनिया ताल में छोड़ दिया था। अब नहरों और गांवों के आसपास मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों को बच्चों, पशुओं और अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है।

डीएफओ निरंजन सुर्वे ने बताया कि वन्यजीवों से बचाव के लिए गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वर्षा के दौरान लोगों को नहर की तरफ अकेले नहीं जाने और समूह में रहने की सलाह दी गई है।

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दर्जिनिया ताल के आसपास वनकर्मियों की गश्त कराई जा रही है। मगरमच्छों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ सर्च अभियान भी चलाया जा रहा है। ताल के सुंदरीकरण और तारबाड़ कराने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। धनराशि उपलब्ध होने पर शीघ्र कार्य कराने का प्रयास किया जाएगा।