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महराजगंज में पर्यटन के नक्शे पर चमकेंगे 10 धार्मिक स्थल, 17.20 करोड़ की मंजूरी

Published: Fri, 06 Nov 2026 11:13 AM (IST)

महराजगंज जिले के 10 प्राचीन धार्मिक स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए शासन से 17.20 ...और पढ़ें

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HighLights

  1. 10 धार्मिक स्थलों के विकास को 17.20 करोड़ स्वीकृत।

  2. लेहड़ा देवी मंदिर में ध्वनि एवं प्रकाश शो बनेगा।

  3. आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे सभी पर्यटन स्थल।

जागरण संवाददाता, महराजगंज। जिले के प्राचीन और पौराणिक महत्व वाले 10 धार्मिक स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए शासन से 17.20 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। योजना के तहत मंदिरों और उनके आसपास के क्षेत्रों का सुंदरीकरण करने के साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे न केवल धार्मिक स्थलों की पहचान बढ़ेगी, बल्कि जिले में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

योजना में सबसे अधिक आठ करोड़ रुपये फरेंदा स्थित प्रसिद्ध लेहड़ा देवी मंदिर के लिए स्वीकृत किए गए हैं। यहां ध्वनि एवं प्रकाश शो (साउंड एंड लाइट शो) विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से मंदिर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित करने की योजना है।

वहीं, निचलौल के प्रसिद्ध ईटहिया शिव मंदिर के विकास के लिए एक करोड़ 20 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां भी श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ परिसर को पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक बनाया जाएगा। इसके अलावा आठ अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के लिए एक-एक करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई है।

इनमें नगर पालिका महराजगंज के वार्ड महुअवा स्थित प्राचीन रामजानकी मंदिर, घुघली के परसिया स्थित प्राचीन शिव मंदिर, मिठौरा के दरहटा स्थित प्राचीन शिव मंदिर, पनियरा के लखिमा स्थित पौराणिक शिव मंदिर तथा धनखरी और गिरगिटिया के रामजानकी मंदिर शामिल हैं। इसी तरह नौतनवा नगर पालिका के वार्ड नंबर चार विष्णुपुरी स्थित प्राचीन काली मंदिर और चंडीथान माता मंदिर का भी पर्यटन की दृष्टि से विकास कराया जाएगा।

इन सभी मंदिरों में स्वीकृत कार्यों के तहत बहुउद्देशीय हाल का निर्माण, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल सुविधा, साइनेज विद क्यूआर कोड, श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच और लैंडस्केपिंग जैसे कार्य कराए जाएंगे। बहुउद्देशीय हाल बनने से धार्मिक आयोजनों और अन्य सामूहिक कार्यक्रमों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध होगा। वहीं, पेयजल और बैठने की व्यवस्था से दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी। क्यूआर कोड युक्त साइनेज के माध्यम से पर्यटक संबंधित स्थल के इतिहास और धार्मिक महत्व की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।

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सहायक पर्यटक अधिकारी प्रभाकर मणि त्रिपाठी ने बताया कि शासन से जिले के 10 धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बजट की स्वीकृति मिल गई है। अब शीघ्र ही संबंधित स्थलों पर प्रस्तावित विकास कार्य शुरू होंगे।

योजना का उद्देश्य केवल मंदिरों का बाहरी स्वरूप संवारना ही नहीं, बल्कि उन्हें व्यवस्थित पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है। बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से इन स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे कारोबार को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

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