महराजगंज (जेएनएन)। दिल्ली में रोहिणी स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के संस्थापक वीरेंद्र देव दीक्षित की काली करतूतों से महराजगंज जिले का एक कुनबा बिखर चुका है। कोल्हुई थाना क्षेत्र अंतर्गत बहदुरी बाजार निवासी राजेंद्र जायसवाल के जीवन में बाबा वीरेंद्र देव व उनके चेलों ने ऐसा जहर घोला कि पूरी जिंदगी नरक बन चुकी है। बाबा के आश्रम से पत्नी उर्मिला तो तीन वर्ष पूर्व किसी तरह से वापस घर लौट आई लेकिन, चार बेटियां श्वेता (27), प्रियंका (25), नेहा (17) व बबिता (15) सात वर्ष से आश्रम में कैद हैं। अपनी बेटियों को बाबा की दरिंदगी से बचाने के लिए उर्मिला देवी दिल्ली के रोहिणी स्थित आश्रम गेट पर जमी हुई हैं। अब पूरे मामले में कोर्ट के निर्णय व आश्रम पर पुलिस की छापेमारी के बाद राजेंद्र जायसवाल को उम्मीद जगी है कि शायद उनकी बेटियां इसके चंगुल से निकल कर वापस घर आ जाएं।  

2007 में उर्मिला ने बेटियों संग ली दीक्षा 

राजेंद्र जायसवाल का परिवार वर्ष 2007 में वीरेंद्र देव दीक्षित के संपर्क में आया। सिद्धार्थनगर जिले के करमी गांव निवासी भगवान दास, प्रहलाद व कृष्ण कुमार ने इनसे बाबा का परिचय कराया था। बाबा की बातों को सुन उर्मिला देवी वशीभूत हो गईं। दीक्षा लेने के बाद चारों बेटियों व बेटे निखिल के साथ उर्मिला का बाबा के फर्रुखाबाद आश्रम में आना-जाना आरंभ हो गया। 2010 से वह नियमित आश्रम में रहने लगीं। बाद में उन्हें दिल्ली के रोहिणी स्थित आश्रम में भेज दिया गया। वर्ष 2012 में जब बाबा की करतूतों की जानकारी उर्मिला देवी को हुई तो बेटे निखिल के साथ वह किसी तरह से आश्रम से भाग आई लेकिन, बेटियां अब तक आश्रम में ही फंसी हैं। उर्मिला ने रोहिणी थाना नई दिल्ली में बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। 

कोल्हुई में वीरेंद्र देव सहित नौ के खिलाफ मुकदमा

आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के संस्थापक वीरेंद्र देव के चंगुल से अपनी बेटियों को छुड़ाने में जब राजेंद्र जायसवाल सफल नहीं हुए तो इनके द्वारा सिविल जज जूनियर डिविजन फरेंदा के न्यायालय में प्रार्थना-पत्र दिया गया। न्यायालय के आदेश पर कोल्हुई पुलिस ने वर्ष 2011 में वीरेंद्र देव दीक्षित, कमला देवी, कन्हैया लाल, लालजी, मोहन, विजय कुमार व रामप्यारे के खिलाफ अपहरण, धोखाधड़ी व जालसाजी  का मुकदमा दर्ज किया। इस मुकदमे में गिरफ्तारी से बचने के लिए वीरेंद्र देव हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया।

बेटियों को छुड़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गया

पिता के साथ बहदुरी स्थित घर पर रह रहे राजेंद्र जायसवाल के लड़के निखिल ने बताया कि जब वह अपनी मां उर्मिला व चारों बहनों के साथ बाबा के  आश्रम में गया तो आश्रम में  झाड़ू पोछा लगाने की ड्यूटी लगाई गई थी। महिलाओं को रहने के लिए आश्रम में अलग कैंपस बना था, वहां पुरुष सेवादारों को जाने की मनाही थी।  राजेंद्र जायसवाल ने बताया कि बाबा वीरेंद्र देव ने मेरे परिवार को बर्बाद कर दिया है। पूरा परिवार बिखर चुका है। पत्नी व बेटा तो किसी तरह आ गए लेकिन बेटियां, बाबा के चंगुल में कैद हैं। बेटियों को छुड़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गया। अब न्यायालय के आदेश के बाद न्याय की उम्मीद जगी है।

 

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