युग प्रवर्तक साहित्यकार थे मुंशी प्रेमचंद
महराजगंज : महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद युग प्रवर्तक साहित्यकार थे। सामंतवादी व्यवस्था के खिलाफ लिख
महराजगंज :
महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद युग प्रवर्तक साहित्यकार थे। सामंतवादी व्यवस्था के खिलाफ लिखे गोदान उपन्यास में प्रेमचंद ने भारत के गांव व गरीबों का सजीव चित्रण किया, वहीं नमक के दरोगा के माध्यम से भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार किया है। ईदगाह कहानी के माध्यम से गरीब परिवार की व्यथा को ठीक से उभारा और हर आम व खास को गरीबों की दुश्वारियों को खत्म करने के लिए प्रेरित किया। सभी विद्यार्थियों को प्रेमचंद का कथा साहित्य पढ़ना चाहिए। ये बातें माता रानी रुमाली देवी महिला महाविद्यालय, नदुआ बाजार में प्रेमचंद के जयंती समारोह में प्रंबधक व ¨हदी साहित्यकार डा. घनश्याम पांडेय ने कहीं। शिक्षक प्रदीप प्रसाद ने प्रेमचन्द को सामाजिक सरोकारों का संवेदनशील रचनाकार बताया। शिक्षक धर्मेंद्र कुमार यादव ने प्रेमचन्द को महान लेखक बताते हुए गरीबों का हितैषी बताया। कार्यवाहक प्राचार्य स्नेहलता द्विवेदी ने प्रेमचन्द को मानवतावादी लेखक बताते हुए कहा कि गोदान में धनिया के माध्यम से नारी की संवेदनशीलता व जीवन संघर्षों का चित्रण कर समाज को उद्वेलित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। कार्यक्रम में दुर्विजय पटेल ,सन्तोष गुप्त एवं महाविद्यालय की छात्राओं ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई ।
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उपन्यास सम्राट प्रेमचंद के विचार आज भी प्रासंगिक
फोटो 31 एमआरजे-20
परिचय- प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण करती प्रधानाचार्य
महराजगंज : उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उपन्यासों व कहानियों के माध्यम से प्रेमचंद ने भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सजीव चित्रण किया साथ ही सामंतवादी व्यवस्था पर भी करारी चोट की। गरीबों व अमीरों के चाल, चरित्र व ¨चतन का सजीव चित्रण प्रेमचंद के उपन्यास व कहानियों में हैं जो हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देता है। इसलिए भारत के गांवों के बारे में जानना है तो सभी विद्यार्थियों को मुंशी प्रेमचंद का साहित्य पढ़ना चाहिए। ये बातें सेंट जोसेफ स्कूल धनेवा धनेई में प्रेमचंद जयंती पर आयोजित गोष्ठी में प्रधानाचार्य लिली थामस ने कहीं। उप प्रधानाचार्य ए बिट्टो ने मुंशी प्रेमचंद को शेक्सपियर व गोर्की से बड़ा साहित्यकार बताया और आम आदमी का हित ¨चतक बताया। कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में अमीर-गरीब के बीच की खाई को शिद्दत से उभारा है। इसी कारण उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और आगे भी रहेंगे। गोदान प्रेमचंद की कालजयी रचना है और इस उपन्यास को हर विद्यार्थी को पढ़ना चाहिए। मुंशी प्रेमचंद की याद में गोरखपुर में प्रेमचंद पार्क का निर्माण कराया गया जहां जाकर हमारी आज की पीढ़ी उनके जीवन के बारे में जान सकती है। इसके पूर्व प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण कर प्रधानाचार्य ने गोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षक अंगद कुमार पांडेय व बबिता ¨सह ने प्रेमचंद के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। गोष्ठी को दीपमाला मिश्रा, अनिता पटेल, संजना ¨सह ने संबोधित किया। संचालन आशुतोष पांडेय ने किया।
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