लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश में अब गंभीर अपराधों में संलिप्त दुर्दांत अपराधियों को उनके कारावास के दौरान पैराल नहीं हासिल हो सकेगी। कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) की संस्तुति पर दुर्दांत अपराधियों की पैराल को लेकर शासनादेश जारी कर दिया गया है।

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी के जारी आदेश के अनुसार सभी डीएम, पुलिस कमिश्नर, एसएसी व एसपी को गृह मंत्रालय की पुनरीक्षित गाइडलाइन के अनुरूप बंदियों के पैरोल (दंड का अस्थायी निलंबन) के प्रकरणों का परीक्षण करने के उपरांत ही संस्तुति शासन को भेजने का निर्देश भी दिया गया है। इसी कड़ी में अब गंभीर अपराध में निरुद्ध सिद्धदोष बंदियों की पैरोल अथवा असमय रिहाई की संस्तुति न किए जाने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

एसआइटी ने अपनी संस्तुति में कहा था कि गंभीर अपराधों में संलिप्त दुर्दांत अपराधियों को उनके आजीवन कारावास के कार्याकाल के दौरान उनको पैरोल पर कतई न छोड़ा जाए और इसलिए शासन को पैरोल के संबंध में कठोर कानून नियमावली व दिशानिर्देश तत्काल निर्धारित करने होंगे, जिससे विकास दुबे सरीखे दुर्दांत अपराधियों को उनके कारावास कार्यकाल के दौरान उनको कारावास से बाहर आने का मौका न मिल सके।

एसआइटी ने प्रस्तावित नियमावली व दिशा निर्देश में अपराधियों व उनके कृत्यों की निगरानी के साथ उनके आर्थिक श्रोतों पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की संस्तुति की थी, जिससे काली कमाई से अपराधियों की नई नर्सरी न पनप सके। 

बता दें कि अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में गठिततीन सदस्यीय एसआइटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए करीब 80 अधिकारियों व कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की थी। एसआइटी ने करीब 3200 पन्नों की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी है, जिसमें प्रशासनिक व पुलिस सुधार की महत्वपूर्ण 29 संस्तुतियां भी हैं। सूत्रों का कहना है कि इनमें 11 लघु अवधि, नौ मध्यम अवधि व सात दीर्घ अवधि की संस्तुतियां हैं। 

यह भी पढ़ें : विकास ने काली कमाई से खड़ा किया था साम्राज्य, SIT जल्द पूरा ब्यौरा ED को सौंपेगी

Edited By: Umesh Tiwari