लखनऊ, जेएनएन। समाजवादी पार्टी के संस्‍थापक सदस्‍यों में से एक और वर्तमान में रामपुर व‍िधानसभा सीट से सपा व‍िधायक आजम खान का स‍िक्‍का स‍िर्फ रामपुर में ही नहीं पूरे उत्‍तर प्रदेश चलता था। यूपी में 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद आजम खां का 42 सालों का साम्राज्य कुछ सालों में ही बिखर गया। आजम खान पर एक के बाद एक मुकदमों ने उन्‍हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा द‍िया। कुछ द‍िन पहले ही आजम खान जेल से बाहर आए है। अब ईडी ( प्रवर्तन निदेशालय) ने रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में उनकी पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को 15 जुलाई को तलब किया है। ईडी के सूत्रों की मानें, तो आजम के बेटे और पत्नी को ईडी के जोनल मुख्यालय में पेश होने के लिए नोटिस भेजा गया है।

बता दें क‍ि कानूनी शिकंजे में फंसे व‍िधायक आजम खान के खिलाफ 102 मामले दर्ज हैं। इनमें नौ शासन द्वारा वापस लिए गए। एक में नामजदगी झूठी पाई गई और सात में अंतिम रिपोर्ट लग चुकी है। 85 मामले विचाराधीन हैं। इनमें 12 में विवेचना चल रही है। आजम खान को 22 मई को 812 द‍िन जेल में रहने के बाद अंतर‍िम जमानत पर र‍िहा क‍िया गया था। उन्‍हें 27 फरवरी 2020 को सीतापुर जेल भेजा गया था। आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ 43 और पत्नी तंजीम फातिमा के खिलाफ 33 मुकदमे विचाराधीन हैं। अदालत ने तीनों को जेल जेल भेज दिया था। अब्दुल्ला 23 माह बाद और तंजीम फातिमा 10 माह बाद जमानत पर छूट सकी थीं।

आजम खान ने अपने राजनीत‍िक सफर की शुरुआत छात्र नेता के रूप में की थी। आजम खान का जन्‍म उत्तरप्रदेश के रामपुर में 14 अगस्‍त 1948 को हुआ था। उन्‍होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई रामपुर के बकर स्‍कूल से पूरी करने के बाद रामपुर के सुंदरलाल इंटर कॉलेज से स्‍नातक और फिर 1974 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। आजम खान का निकाह ताजीन फातिमा से हुआ है और उनके दो बेटे अदीब खान और अब्‍दुल्‍लाह खान हैं।

आजम खान का राजनीतिक सफर पढ़ाई के दौरान अलीगढ़ मुस्‍लिम यूनिवर्सिटी से ही शुरु हो गया था। वे वहां विद्यार्थी संघ के सचिव थे। आजम खान ने 1976 में जनता दल ज्‍वाइन करने के बाद जिला स्‍तर की राजनीति की। राजनीतिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए अलीगढ़, फैजाबाद, उन्नाव और वाराणसी में तीन साल के लिए कई बार जेल भी गए। इसके अलावा आपातकाल के दौरान मीसा के तहत भी उन्‍हें गिरफ्तार किया गया था।

आजम खान 1980, 1985, 1989, 1991, 2002, 2007 और 2012 में राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य रहे। 1981-82 में संसदीय अनुसंधान, संदर्भ और राज्य विधानसभा की अध्ययन समिति के सदस्य थे। आजम खान 1989 में उत्‍तरप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और 05 दिसंबर 1989 से 24 जून 1991 तक श्रम, रोजगार, मुस्लिम वक्‍फ और हज के लिए काम किया। 1993 में वे एक बार फिर राज्‍य सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। 1994 में आजम खान माइनोरिटी फारम आफ इंडिया के अध्‍यक्ष बने और समाजवादी पार्टी को ज्‍वाइन कर लिया। इसी साल वे समाजवादी पार्टी के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी बने।

आजम खान को 1996 में राज्‍यसभा के लिए चुना गया और वो 9 मार्च 2002 तक राज्‍यसभा के सदस्‍य रहे। इसके बाद आजम खान 13 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक उत्तरप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। 6 सितंबर 2003 से 13 मई 2007 तक संसदीय मामलों, शहरी विकास, जल आपूर्ति, शहरी रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन के कैबिनेट मंत्री बने।

लोकसभा चुनाव जीते थे आजम फ‍िर छोड़ दी थी सीट: 2009 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने रामपुर सीट से जयाप्रदा को टिकट दे दिया। इसके बाद आजम खान उनके खिलाफ चुनाव लड़े और हार गए। इसके बाद सपा ने आजम खान को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया, लेकिन 4 दिसंबर 2010 को पार्टी ने उनका निष्‍कासन रद्द करते हुए पार्टी में वापस बुला लिया। 2012 में अखिलेश यादव सरकार में वे कैबिनेट मंत्री बने। बाद में उन पर कई तरह के आरोप लगे, जिसके चलते उन्हें इस्‍तीफा भी देना पड़ा था। आजम खान को 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी द्वारा रामपुर निर्वाचन क्षेत्र से टिकट दिया गया, जहां पर वह भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार जयाप्रदा को हराकर विजय हुए। ज‍िसे उन्‍होंने रामपुर व‍िधानसभा सीट जीतने के बाद छोड़ द‍िया था।

आजम के पत्‍नी और बेटे भी लम्‍बे समय तक जेल में रहे: आजम खान के बेटे अब्दुल्ला 11 माह और उनकी पत्नी डा. तजीन फात्मा दस माह बाद जेल से छूटी थीं। आजम खां के खिलाफ साल 2019 में बड़े पैमाने पर मुकदमे दर्ज हुए। लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन और भड़काऊ भाषण देने में 15 मुकदमे लिखे गए तो बाद में जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीने कब्जाने के 30 मुकदमे दर्ज हुए। इसके अलावा 12 मुकदमे घोसियान प्रकरण में दर्ज हुए। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सपा शासनकाल में आजम खां के कहने पर घोसियान बस्ती में बने मकानों को तोड़कर लूटपाट की गई और उनके स्कूल के लिए जमीन पर कब्जा किया गया।

आजम पर भैंस लेकर बकरी चोरी तक के लगे आरोप: सपा नेता पर भैंस चोरी, बकरी चोरी के भी आरोप लगे। आजम खान के समर्थकों पर 11 मुकदमे डूंगरपुर प्रकरण में दर्ज कराए गए। यहां पहले लोगों के मकान बने थे, जिन्हें नगर पालिका की जमीन पर बताकर तोड़ दिया और गरीबों के लिए आसरा आवास बनवा दिए गए। इस प्रकरण में आजम खां नामजद नहीं थे। लेकिन, पुलिस ने उनके नमाजद समर्थकों को गिरफ्तार किया तो उन्होंने आजम खां के इशारे पर वारदात करने की बात कही। इसपर इन मामलों में भी आजम खां का शामिल कर दिया। इन सभी में उन्हें एक सप्ताह के अंदर जमानत मिल चुकी है।

पुराने भी 10 मुकदमे: आजम खान के खिलाफ लोकसभा चुनाव से पहले के भी 10 मुकदमे दर्ज थे। इनके अलावा और भी कई मुकदमे विचाराधीन हैं। राज्यसभा सदस्य रहे स्वर्गीय अमर सिंह के खिलाफ भी उन्होंने बयान दिया था। इसपर उनके खिलाफ मुकदमा हुआ। उनकी मां ने फांसी घर की जमीन खरीदी थी। इस मामले में भी पुलिस ने विवेचना के दौरान उनका नाम शामिल कर लिया। जौहर यूनिवर्सिटी में शत्रु संपत्ति की जमीन कब्जाने में भी उनपर केस दर्ज हुआ। इन तीनों मामलों में भी उनकी जमानत नहीं हो सकी है। बेटे अब्दुल्ला आजम के दो पासपोर्ट के मामले में भी आजम खां नामजद हैं। इसमें हाईकोर्ट से भी जमानत खारिज हो गई है।

Edited By: Prabhapunj Mishra