यूपी में गेहूं खरीद ने तोड़ा रिकॉर्ड! पिछले साल से ज्यादा खरीद, फिर भी 60 लाख टन लक्ष्य अभी दूर
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने गेहूं की सरकारी खरीद में पिछले साल के आंकड़े को पार कर लिया है। इस बार 10.22 लाख टन गेहूं खरीदा गया है जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 9.31 लाख टन था। किसानों को 2425 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। मोबाइल क्रय केंद्रों ने खरीद में तेजी लाने में मदद की है।

दिलीप शर्मा, लखनऊ। गेहूं की सरकारी खरीद में योगी सरकार पिछले खरीद सत्र से आगे निकल गई है। बीते साल सरकारी क्रय केंद्रों पर हुई कुल खरीद के आंकड़े को इस बार प्रक्रिया पूरी होने के 18 दिन पहले ही पार कर लिया गया है।
बुधवार तक सरकारी केंद्रों पर 10.22 लाख टन गेहूं खरीदा जा चुका था, जबकि बीते साल पूरे सत्र में 9.31 लाख टन गेहूं की कुल खरीद की गई थी। विक्रय करने वाले किसानों की संख्या भी पिछले वर्ष के मुकाबले ज्यादा हो चुकी है, हालांकि इस स्थिति के बाद भी निर्धारित लक्ष्य पूरा होता नजर रही है।
प्रदेश में 17 मार्च से गेहूं खरीद शुरू की गई थी, जो 15 जून तक की जानी है। इस बार किसानों को 2425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान किया जा रहा है। इसके लिए 5853 क्रय केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। मोबाइल क्रय केंद्रों की सुविधा भी शुरू की गई है, जो किसानों के घर जाकर गेहूं क्रय कर रहे हैं।
अवकाश के दिनों में भी क्रय केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन कोशिशों के बाद पिछले दिनों गेहूं क्रय की गति तेज हुई थी। खाद्य एवं रसद विभाग के आंकड़ों के अनुसार खरीद सत्र 2024-25 में 1,80,083 किसानों से 9,31,016 टन गेहूं की खरीद की गई थी, तब 6488 क्रय केंद्रों का संचालन किया गया था।
इस बार खरीद सत्र खरीद शुरु होने के 90 दिनों में ही खरीद का आंकड़ा 10,22,959 टन पहुंच गया है। यह खरीद 1,99,332 किसानों से की गई है। जबकि गेहूं क्रय के लिए अब तक 4,58,372 किसानों ने पंजीकरण कराया है।
इसके बावजूद अब खरीद की रफ्तार धीमी पड़ रही है, ऐसे में तमाम कोशिशों के बाद भी खरीद के लिए इस बार के लिए निर्धारित किया गया 60 लाख टन का लक्ष्य पूरा न हो पाने की आशंका जताई जा रही है।
मोबाइल क्रय केंद्रों ने बढ़ाई गति
गेहूं खरीद के आंकड़े को ऊपर ले जाने में मोबाइल क्रय केंद्रों ने बड़ी भूमिका निभाई है। खरीद शुरू होने के पहले 15 दिन तक किसान क्रय केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे थे, इसके बाद भी जब खरीद की गति नहीं बढ़ी तो संचालित केंद्रों को ही मोबाइल क्रय केंद्र के रूप में उपयोग किया गया।
किसान के घर पहुंचकर गेहूं खरीद गया। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों के मुताबिक करीब 60 प्रतिशत खरीद इन्हीं मोबाइल केंद्रों के माध्यम से हुई है।
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