लखनऊ, जेएनएन। एक तो महिलाओं को रोजगार मिल गया, दूसरा घरों से हर दिन कूड़ा भी उठ सकेगा। जिला नगरीय विकास अधिकरण (डूडा) के स्वयं सहायता समूह की 50 महिलाओं को रोजगार से जोड़ते हुए कूड़ा प्रबंधन की बागडोर सौंपी गई है। इन महिलाओं को रिक्शा ट्रॉली दी गई है। महिलाएं विद्यावती वार्ड के सेक्टर सी, एफ, एफ-2 विस्तार, एन और एन के करीब 5600 घरों से कूड़ा एकत्र करेंगी। हर महिला को 110 घरों से कूड़ा उठाने का जिम्मा दिया गया है। कूड़ा लेने के एवज में मिलने वाले यूजर चार्ज से छह हजार रुपये मानदेय हर माह उन्हें दिया जाएगा।

नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि हर रिक्शा ट्रॉली में अलग-अलग रंग का कूड़ेदान रखा गया है। दो हरी डस्टबिन में गीला कूड़ा, दो नीली डस्टबिन में सूखा कूड़ा, काली में घरेलू खतरनाक कूड़ा और पीली डस्टबिन में सेनेट्री नैपकिन और मेडिकल कचरा रखा जाएगा। महिलाओं को गुलाबी साड़ी और आइकार्ड भी दिया गया है। उन्हें नगर निगम की तरफ से रसीद बुक दी जाएगी, जिससे वह घर-घर कूड़ा लेने का यूजर चार्ज वसूल कर नगर निगम में जमा करेंगी। इस योजना के पर्यवेक्षण के लिए जोनल अधिकारी-आठ संगीता कुमारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

शुक्रवार को औरंगाबाद कल्याण मंडप में आयोजित कार्यक्रम में महापौर संयुक्ता भाटिया और नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने हरी झंडी दिखाकर रिक्शा ट्रॉली को रवाना किया। इस अवसर पर अपर नगर आयुक्त डॉ. अर्चना द्विवेदी, डूडा की परियोजना अधिकारी निधि बाजपेयी, जोनल अधिकारी आठ संगीता कुमारी, पार्षद कौशलेंद्र द्विवेदी, बीना रावत, विमल तिवारी मौजूद थे।

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