पहलगाम की आतंकी घटना पर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का बड़ा बयान, बोले-हमारे साहस और एकता की परीक्षा
उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के जीवनवृत्त पर आधारित पुस्तक ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ का विमोचन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कश्मीर के पहलगाम में आतंकी घटना पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने न्यायपालिका और विधायिका के कार्य का भी वर्णन किया।

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ : उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि पहलगाम जैसी घटनाएं हमारे साहस और एकता की परीक्षा लेती हैं, लेकिन हमें हर परिस्थिति का मुकाबला करना आता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पूरे देश को भरोसा है।
पिछले दिनों न्यायपालिका को उसके अधिकारों को लेकर चेताने वाले धनखड़ ने यहां भी अपनी बात को आगे बढ़ाया और कहा कि मैं न्यायपालिका का सम्मान करता हूं, लेकिन स्पष्ट करना चाहता हूं कि न्यायपालिका का कार्य निर्णय देना है और विधायिका का कार्य कानून बनाना है। लोकतंत्र सहयोग, सहकारिता और एकजुटता से चलता है।'
डा. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) परिसर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के जीवनवृत्त पर आधारित पुस्तक ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ का गुरुवार को विमोचन करने के बाद संबोधन में उप राष्ट्रपति ने लोकतंत्र में अभिव्यक्ति और वाद-विवाद को अत्यंत आवश्यक बताया।
उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति का अधिकार जब 'मैं ही सही हूं' की जिद में बदल जाए और दूसरों की बात न सुनी जाए, तो यह अधिकार विकार में परिवर्तित हो जाता है।’ उन्होंने यूपी को उत्तम प्रदेश बताते हुए कहा, ‘बिना टैक्स बढ़ाए उत्तर प्रदेश की जीडीपी को 30 लाख करोड़ तक पहुंचाना एक बड़ी उपलब्धि है, जो हर अर्थशास्त्री के लिए शोध का विषय बन सकती है।’
राज्यपाल ने अपनी पुस्तक के संबंध में कहा कि 'यह पुस्तक सिर्फ मेरा जीवनवृत्त नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत और अतीत का दस्तावेज है।' परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि चुनौतियों का सामना करके ही व्यक्ति आगे बढ़ता है। यह पुस्तक उस नारी शक्ति की कहानी है जिसने विषम परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'चुनौतियां मुझे पसंद हैं' को नई पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक ग्रंथ बताया। कहा, ‘यह पुस्तक संसाधनों की कमी, सामाजिक बंदिशों और विपरीत परिस्थितियों के बीच दृढ़ निश्चय से आगे बढ़ने वाली नारी शक्ति का जीवनचित्र प्रस्तुत करती है।’ सीएम ने लेखक विनय जोशी, अशोक देसाई और पंकज जानी का आभार जताया, जिन्होंने इस कृति को 14 अध्यायों में समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों की भांति सजाया।
इससे पहले राज्यपाल की पुत्री अनारबेन पटेल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में राज्यपाल के जीवन पर आधारित एक डाक्यूमेंट्री फिल्म भी प्रदर्शित की गई। इस अवसर पर उप राष्ट्रपति की पत्नी सुदेश धनखड़, पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, राज्य सरकार के कई मंत्री व राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित रहे।
योगी ने उप राष्ट्रपति को भेंट किया चांदी का कलश
मुख्यमंत्री ने जैसे ही मंच पर कदम रखा उनके हाथों में चमकता चांदी का कलश सभी की नजरों का केंद्र बन गया। इस विशेष कलश में गंगाजल भरा था, जो पवित्रता और परंपरा का प्रतीक था। उन्होंने यह कलश उप राष्ट्रपति को भेंट किया। वहीं, स्वामी चिदानंद सरस्वती ने उन्हें रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया। समारोह में राजभवन द्वारा प्रकाशित पुस्तकों के साथ-साथ प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों के स्टाल भी लगाए गए थे।
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