लखनऊ, जेएनएन। UPPCL PF Scam: उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन (यूपीपीसीएल) के लाखों कर्मचारियों के पीएफ का पैसा भगोड़ी कंपनी (डीएचएफसीएल) में लगाने के करोड़ों के घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की टीम अब बड़ों लोगों पर भी शिकंजा कसेगी। सीबीआई की टीम केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर तैनात सीनियर आइएएस अफसर संजय अग्रवाल के साथ ही यूपी पावर कॉरपोरेशन के पूर्व एमडी अयोध्या प्रसाद (एपी) मिश्रा से भी पूछताछ करेगी। 

प्रदेश की राजनीति को गरमाने वाले इस घोटाले के समय संजय अग्रवाल प्रमुख सचिव ऊर्जा के पद पर तैनात थे। इस समय वह प्रतिनियुक्त पर केन्द्र में तैनात हैं। इसके अलावा सीबीआई एक-दो दिन में इस मामले में जेल में बंद एपी मिश्रा के साथ अन्य निदेशकों से भी सवाल जवाब करेगी।

सीबीआई 22 अरब के पीएफ घोटाले में जेल में बंद निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी व सचिव पीके गुप्ता के बयान ले चुकी है। इनके बयान का मिलान ईओडब्ल्यू के सामने दिये बयान से कराया गया था। इनमें समानता मिली थी। वहीं ब्रोकर फर्मो के संचालकों व कर्मचारियों से सीबीआई ने कई सवालों का जवाब मांगा है। इन लोगों ने जवाब नहीं दिया है। सीबीआई के अधिकारियों का कहना है कि इनको नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।

सीबीआई का दावा है कि आईएएस संजय अग्रवाल के बयान होने के बाद इस मामले में यूपीपीसीएल के कुछ और भी कर्मचारियों से भी पूछताछ होगी। सोमवार को तीन कर्मचारियों से पुलिस ने कुछ सवाल जवाब किये थे। पर, कुछ फाइलें विभाग से न आने पाने के कारण इनसे ज्यादा पूछताछ नहीं की जा सकी। इस मामले में सीबीआई ने नौ मई को आईएएस आलोक कुमार व अपर्णा यू के बयान दर्ज किये थे।

सीबीआइ अब जेल में बंद पावर कारपोरेशन के तत्कालीन एमडी एपी मिश्र, तत्कालीन सचिव ट्रस्ट पीके गुप्ता व अन्य आरोपितों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। अभी लॉकडाउन के चलते सीबीआइ को थोड़ा इंंतजार करना पड़ सकता है। शनिवार को पावर कारपोरेशन के तत्कालीन चेयरमैन आलोक कुमार और एमडी अपर्णा यू. के बयान दर्ज करने के बाद जल्द केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात पावर कारपोरेशन के तत्कालीन अध्ययक्ष संजय अग्रवाल से भी सवाल-जवाब की तैयारी है।

प्रदेश के इस बड़े घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू ने दिल्ली जाकर वरिष्ठ आइएएस अधिकारी संजय अग्रवाल के बयान दर्ज किए थे। दूसरी ओर सीबीआइ की निगाहें उन ब्रोकर फर्मों पर भी टिकी हैं, जिनके जरिए करोड़ों के कमीशन का खेल हुआ था। जांच के दायरे में आईं कई ब्राोकिंग फर्मों की भूमिका संदिग्ध है, जिसकी पड़ताल की जा रही है। तह तक जाने के लिए सीबीआइ को इन फर्मों के संचालकों व उनसे जुड़े अन्य लोगों की छानबीन करेगी। दरअसल, पीएफ की रकम को निजी कंपनी डीएचएफएल में निवेश कराने में फर्जी ब्रोकर फर्मों की भी मदद ली गई थी और इस साजिश में तत्कालीन सचिव ट्रस्ट पीके गुप्ता के बेटे अभिनव गुप्ता की भूमिका भी सामने आई थी। इनफो लाइन नाम से फर्जी ब्राोकर फर्म संचालित करने वाले आशीष चौधरी को भी ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार भी किया था। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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