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    UP Rozgar Mission: 1.25 लाख युवाओं को नौकरी, योगी कैबिनेट के इस फैसले से महिलाओं को मिलेगी काम करने की आजादी

    Updated: Thu, 03 Jul 2025 03:56 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन का उद्देश्य निजी क्षेत्रों में युवाओं को नौकरी दिलाना और विदेश में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। श्रम विभाग नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। सरकार ने महिला श्रमिकों को भी 29 खतरनाक श्रेणी के कारखानों में काम करने की अनुमति दी है।

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    अब यूपी रोजगार मिशन से युवाओं को देश-विदेश में मिलेगा रोजगार

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश के युवाओं को देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। गुरुवार को कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन’ के गठन की स्वीकृति मिल गई है। यह मिशन प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार निजी क्षेत्रों में नौकरी दिलाने में मदद करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि एक वर्ष के भीतर देश में एक लाख और विदेशों में 25 से 30 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

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    श्रम मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि अब तक श्रमिकों को विदेश भेजने का काम सीधे श्रम एवं सेवायोजन विभाग द्वारा नहीं किया जाता था। इसके लिए विभिन्न निजी या पंजीकृत एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई श्रमिक अपने प्रयास से या एजेंटों की मदद से विदेश जाते थे, जिससे कई बार उन्हें शोषण या धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब श्रम विभाग विदेशों में रोजगार दिलाने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।

    विभाग रोजगार दिलाने के साथ ही प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, करियर काउंसलिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगा। इसके लिए मिशन का संचालन पांच स्तर की समितियों द्वारा किया जाएगा, जिनमें शासी परिषद, राज्य संचालन समिति, राज्य कार्यकारिणी समिति, जिला कार्यकारिणी समिति और राज्य कार्यक्रम प्रबंधन इकाई शामिल होंगी।

    मिशन को सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम के तहत पंजीकृत किया जाएगा। विदेशों में भारतीय कुशल श्रमिकों की मांग तेजी से बढ़ रही है। प्रदेश सरकार इस अवसर का लाभ उठाते हुए राज्य के कुशल युवाओं को सीधे इजरायल, जर्मनी और जापान जैसे देशों में भेजने की योजना बना रही है।

    इजरायल से छह हजार युवाओं ने भेजे एक हजार करोड

    एक साल पहले ही श्रम एवं सेवायोजन विभाग ने केंद्र सरकार कौशल विकास के तहत छह हजार श्रमिकों को इजरायल भेजा गया था, जिन्होंने एक वर्ष में लगभग 1000 करोड़ रुपये अपने परिवारों को भेजी। प्रदेश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह भी होगा। अब मिशन के माध्यम से यह प्रक्रिया और व्यवस्थित की जाएगी।

    विभाग के अनुसार, वर्तमान में जर्मनी में एक हजार नर्सिंग स्टाफ, जापान में एक हजार केयर गीवर, और इजरायल में पांच हजार केयर गीवरों की आवश्यकता है। मिशन के माध्यम से इन पदों के लिए उत्तर प्रदेश से श्रमिकों को प्रशिक्षण दिलाकर सीधे भेजा जाएगा। साथ ही, विदेश जाने वाले प्रत्येक श्रमिक का रिकार्ड सरकार के पास होगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में उसे मदद पहुंचाई जा सकेगी।

    अब हर कारखाने में महिला श्रमिकों को मौका

    कैबिनेट में लिए गए एक अन्य अहम फैसले के तहत उत्तर प्रदेश कारखाना नियमावली 1950 में संशोधन की संस्तुति दी गई है। इसके तहत अब महिलाएं 29 खतरनाक श्रेणी में आने वाले कारखानों में भी अपनी इच्छा से काम कर सकेंगी। पहले उन्हें केवल 12 सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्रों में ही काम करने की अनुमति थी।

    सरकार ने यह कदम महिला श्रमिकों को समान अवसर और आत्मनिर्भरता देने के उद्देश्य से उठाया है। साथ ही उनकी सुरक्षा और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी रहेगी। फिलहाल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में महिला श्रमिकों की भागीदारी सिर्फ पांच प्रतिशत है। नोएडा को छोड़ दें तो पूरे प्रदेश में केवल एक प्रतिशत महिलाएं ही कारखानों में काम करती हैं। इस निर्णय से महिला श्रमिकों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।