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    UP News: राजनाथ सिंह बोले- सीजफायर उल्लंघन पर सेना दे रही मुंहतोड़ जवाब, आगे भी देती रहेगी

    राजनाथ सिंह ने कहा कि श्री गुरुनानक साहिब ने सामाजिक समरसता के लिए दया संतोष और त्याग को आधार बनाया। उन्होंने ऐसे समाज की कल्पना की जो जात-पात ऊंच-नीच से ऊपर उठकर सबकी भलाई के लिए काम करे। महाराजा रणजीत सिंह ने हरिमंदिर साहिब पर स्वर्ण चक्र और काशी विश्वनाथ मंदिर पर सोने का छत्र लगवाया।

    By Jagran NewsEdited By: Mohammad SameerUpdated: Mon, 30 Oct 2023 06:45 AM (IST)
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    श्रीराम जन्मभूमि के लिए सिख समाज ने दिया बड़ा योगदानः राजनाथ सिंह (file photo)

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र लखनऊ में भारतीय सेना की जमकर सराहना की। रक्षामंत्री गुरुद्वारा आलमबाग में गुरु रामदास के प्रकाशोत्सव में शामिल हुए और गुरु ग्रंथ साहिब पर मत्था टेका।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि सीज फायर पर अब सेना के जवान मुस्तैद हैं। सेना तो सीज फायर के उल्लंघन का मुंहतोड़ जवाब दे रही है और आगे भी देती रहेगी। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब सिर्फ सिख समाज के लिए ही नहीं, पूरे समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।

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    सिख समाज ने सनातन धर्म की रक्षा और श्रीरामजन्म भूमि के लिए भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। रक्षामंत्री ने कहा कि श्री गुरुनानक साहिब ने सामाजिक समरसता के लिए दया, संतोष और त्याग को आधार बनाया। उन्होंने ऐसे समाज की कल्पना की, जो जात-पात, ऊंच-नीच से ऊपर उठकर सबकी भलाई के लिए काम करे।

    महाराजा रणजीत सिंह ने हरिमंदिर साहिब पर स्वर्ण चक्र और काशी विश्वनाथ मंदिर पर सोने का छत्र लगवाया था, लेकिन बाद में काशी का छत्र लूट लिया गया। मैं मानता हूं कि अमृतसर के मंदिर का स्वर्ण छत्र आज भी भारतीय संस्कृति के स्वर्णिम समय की याद दिलाता है, जिसकी रक्षा के लिए पंजाब की धरती और खालसा पंथ ने महान बलिदान दिए। श्रीराम जन्मभूमि के लिए भी सिख समाज के योगदान कोई भूल नहीं सकता।

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    सिखों ने ही शुरू किया राम जन्मभूमि आंदोलन 

    राम जन्मभूमि के लिए एक दिसंबर 1858 की एफआइआर के अनुसार सिखों ने गुरु गोबिंद सिंह जी की जय-जयकार करते हुए परिसर पर कब्जा किया था और पूरे मंदिर परिसर में राम-राम लिख दिया था। इस तथ्य के अनुसार यह आंदोलन भी सिखों से ही आरंभ होता है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों के बलिदान दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में पूरे देश में मनाने का फैसला लिया। भारतीय समाज में सिख समाज के योगदान को देश किसी भी सूरत में नहीं भूल सकता।