UP News: प्रदेश में 8,600 परिवारों को मकान के लिए मिलेगी पट्टे पर जमीन, कृषि भूमि से वंचितों को भी मिलेगा लाभ
प्रदेश में इस वर्ष 8600 परिवारों को मकान के लिए गांव सभा की जमीन पट्टे पर दी जाएगी। वहीं कृषि भूमि से वंचित परिवारों को खेती के लिए गांव सभा की 460 हेक्टेयर जमीन पट्टे पर देने का इरादा है।
लखनऊ [राजीव दीक्षित]: प्रदेश में इस वर्ष 8,600 परिवारों को मकान के लिए गांव सभा की जमीन पट्टे पर दी जाएगी। वहीं कृषि भूमि से वंचित परिवारों को खेती के लिए गांव सभा की 460 हेक्टेयर जमीन पट्टे पर देने का इरादा है। मत्स्य पालन के लिए वर्तमान वर्ष में 2,600 हेक्टेयर तालाब की भूमि पट्टे पर देने की मंशा है। कुम्हारी/ मूर्ति कला से जुड़े लोगों को मिट्टी निकालने की सुविधा देने के लिए प्रदेश में 1,350 स्थल चिह्नित किए गए हैं।
भूमि सुधार कार्यक्रमों के अंतर्गत राजस्व परिषद ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए गांव सभा की जमीनों को कृषि भूमि, आवास स्थल, मत्स्य पालन तथा कुम्हारी/मूर्तिकला के लिए मिट्टी निकालने के स्थलों के आवंटन के जिलावार लक्ष्य तय कर जिलाधिकारियों को जारी कर दिया है। गांव के किसी परिवार के पास यदि मकान के लिए जमीन नहीं है तो सरकार उसे आवास स्थल के लिए गांव सभा की जमीन पट्टे पर देती है।
आवास के लिए उपलब्धता के आधार पर प्रति परिवार अधिकतम 150 वर्ग मीटर जमीन पट्टे पर दी जा सकती है। प्रयागराज में सर्वाधिक 345 परिवारों को आवास स्थल के लिए जमीन का पट्टा देने का लक्ष्य है, जबकि गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में यह लक्ष्य शून्य है।
गांव के किसी व्यक्ति के पास खेती के लिए जमीन न होने पर सरकार उसे पट्टे पर कृषि भूमि भी देती है। यह पट्टा असंक्रमणीय भूमिधर के रूप में दिया जाता है, यानी पट्टाधारक पांच वर्ष तक जमीन को किसी अन्य को बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकता है। शाहजहांपुर जिले में सर्वाधिक 44 हेक्टेयर कृषि भूमि को पट्टे पर देने का लक्ष्य तय किया गया है। वहीं गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में यह लक्ष्य शून्य है।
तालाबों की जमीन भी पट्टे पर देती है सरकार
मत्स्य पालन के लिए भी सरकार तालाबों की जमीन 10 वर्ष के लिए पट्टे पर देती है। आधे एकड़ से लेकर दो हेक्टेयर तक के तालाबों का आवंटन व्यक्ति तथा इससे अधिक बड़े तालाबों का आवंटन मछुआ समिति को किया जाता है। तालाबों के पट्टों में निषाद और कहार जाति के लोगों को वरीयता दी जाती है। तालाब की सर्वाधिक 100 हेक्टेयर भूमि प्रयागराज में पट्टे पर देने का लक्ष्य है जबकि सबसे कम पांच हेक्टेयर जमीन कासगंज में देने का इरादा है।
कुम्हारी/मूर्तिकला के लिए कुम्हार जाति के लोगों को मिट्टी निकालने के लिए बरेली में सर्वाधिक 50 स्थलों का पट्टा देने का लक्ष्य है। वहीं गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में यह लक्ष्य शून्य है।
लखनऊ मंडल के जिलावार लक्ष्य
आवास स्थल आवंटन (परिवार की संख्या)
उन्नाव - 150
खीरी - 155
रायबरेली - 150
लखनऊ - 70
सीतापुर - 55
हरदोई - 230
कृषि भूमि आवंटन (हेक्टेयर में)
उन्नाव - 16
खीरी - 12
रायबरेली - 8
लखनऊ - 3
सीतापुर - 31
हरदोई - 30
मत्स्य पालन आवंटन (हेक्टेयर में)
उन्नाव - 30
खीरी - 55
रायबरेली - 50
लखनऊ - 35
सीतापुर - 35
हरदोई - 75
कुम्हारी कला के लिए आवंटन (स्थलों की संख्या)
उन्नाव - 45
खीरी - 20
रायबरेली - 45
खनऊ - 20
सीतापुर - 15
हरदोई - 30।
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