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    पुरानी पेंशन योजना बहाली को लेकर डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा व कर्मचारियों के बीच वार्ता विफल

    By Dharmendra PandeyEdited By:
    Updated: Tue, 09 Oct 2018 08:41 AM (IST)

    पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर रैली के बीच उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के साथ वार्ता के लिए राज्य कर्मचारी उनके कार्यालय पहुंचे। वहां कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।

    पुरानी पेंशन योजना बहाली को लेकर डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा व कर्मचारियों के बीच वार्ता विफल

    लखनऊ (जेएनएन)।   पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी-पुरानी पेंशन बहाली मंच द्वारा सोमवार को आयोजित रैली ऐतिहासिक रही। राज्य व केंद्रीय कर्मचारियों के 150 और शिक्षकों के 36 संगठनों के बैनर तले जुटे एक लाख से ज्यादा लोगों को देख जहां राजधानी के पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए, वहीं रैली खत्म होने से पहले ही इसकी धमक शासन तक पहुंच गई।

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    राज्य सरकार ने तुरंत वार्ता का बुलावा भेजा, जिस पर ईको गार्डन में चल रही रैली के बीच से ही नेता वार्ता के लिए गए लेकिन, यह बेनतीजा रही। मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय व वित्त, कार्मिक और गृह के अफसरों की मौजूदगी में उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजधानी में न होने और अगले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री से वार्ता कराने का आश्वासन दिया लेकिन, वह लिखित व समयबद्ध न होने पर नेताओं ने 25 से 27 अक्टूबर की हड़ताल की घोषणा कर दी। इस बीच कुछ न होने पर 27 को अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा करने की चेतावनी भी दी।

    दिल्ली तक जाने का शंखनाद
    मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी व अध्यक्ष डॉ.दिनेश चंद शर्मा ने पुरानी पेंशन बहाल होने तक आंदोलन के न रुकने का शंखनाद करते हुए दिल्ली तक पहुंच कर केंद्र सरकार की कुर्सी हिलाने की चेतावनी दी। करीब 2.50 करोड़ राज्य कर्मचारी व 32 लाख केंद्रीय कर्मचारियों से नई पेंशन योजना के नाम पर लिए गए लगभग दस हजार करोड़ रुपये का सरकारों के पास कोई लेखा-जोखा न होने का हवाला देते हुए कहा कि अब सभी राज्यों में ऐसा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

    वक्ताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना यदि बहाल न हुई तो अगले साल केंद्र सरकार उन लोगों को भी पेंशन न देने का एलान कर देगी, जिन्हें देने का वादा उसने किया है और जिन्हें वर्तमान में पेंशन मिल रही है। कर्मचारी व शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी कि इसके लिए मोर्चा खोल दिया गया है और अब परिणाम की चिंता नहीं है।

    आंदोलन के लिए बड़े अधिकारी जिम्मेदार
    कर्मचारी अधिकारी महापरिषद के पूर्व अध्यक्ष बाबा हरदेव सिंह ने आंदोलन के लिए सरकार के बड़े अधिकारियों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, अब सरकार को कर्मचारियों से सीधे वार्ता कर हल निकालना चाहिए। मंच के अध्यक्ष डॉ.दिनेश चंद शर्मा ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट के बाद सरकार पर विश्वास करना कर्मचारी हित में नहीं है। संयोजक हरिकिशोर ने कहा कि सरकार कर्मचारियों से रात दिन विकास कार्य कराती है,

    इसलिए उनकी जायज समस्याओं का समाधान भी त्वरित गति से होना चाहिए। तिवारी ने कहा कि सरकार ने वार्ता में कोई समय तय नहीं किया है, इसलिए पूरे प्रदेश के कर्मचारी व शिक्षक अब हड़ताल पर जाएंगे। रेलवे नेता शिवगोपाल मिश्र ने इसे हक की लड़ाई ठहराते हुए केंद्रीय कर्मचारियों के भी पूरी तरह साथ रहने का दावा किया।

    विधानभवन भी घेरा
    एक ओर ईको गार्डन कर्मचारियों व शिक्षकों के नारों से गूंज रहा था तो इधर उनके एक बड़े समूह ने विधान भवन को घेर लिया। प्रदेश के सभी जिलों के साथ कई अन्य राज्यों से भी आए कर्मचारियों की भारी संख्या देख बैकफुट पर आया पुलिस-प्रशासन उनसे हटने का आग्रह करने से ज्यादा कुछ नहीं कर सका। आधे घंटे तक ठप रही व्यवस्था के बाद कर्मचारी तब ही हटे, जब मंच के नेताओं ने उन्हें यहां से हटने का निर्देश दिया।

    खूब लगे नारे, निशाने पर रही सरकार
    कर्मचारी नेताओं ने रैली में 2.30 लाख कर्मचारियों व शिक्षकों के शामिल होने का दावा किया। इसमें राज्यकर्मियों व शिक्षकों के साथ केंद्र सरकार के रेलवे सहित अन्य कर्मचारी मौजूद थे। उनकी भारी मौजूदगी के बीच सरकार के साथ सांसद व विधायक भी निशाने पर रहे। वक्ताओं ने कहा कि कुछ समय के लिए ही रहने वाले सांसदों-विधायकों को एक नहीं कई पेंशन मिलती हैं, जबकि जीवन भर सेवा देने वाले कर्मचारियों की एकमात्र पेंशन से भी सरकार खिलवाड़ कर रही है।

    उमस ने किया बेहाल
    रैली स्थल के आसपास हालांकि पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई थी लेकिन, टेंट के नीचे भारी उमस के कारण पसीने से लथपथ कर्मचारी-शिक्षक बेहाल रहे। वाहन खड़ा करने की जगह न बचने के कारण कई बसें और चौपहिया वाहन एक किलोमीटर से भी ज्यादा दूर रुक गए। इन वाहनों और रैली स्थल के बीच आवाजाही से हर ओर जुलूस जैसा नजारा था।

    अटेवा-पुरानी पेंशन बचाओ मंच यूपी के मीडिया प्रभारी राजेश यादव कहते हैं कि न्यू पेंशन स्कीम एक म्यूचुअल फंड की तरह है जिससे कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, एनपीएस जो है, वह शेयर मार्केट पर आधारित व्यवस्था है। पुरानी पेंशन में हर साल डीए जोड़ा जाता था, जो कि एनपीएस में नहीं है। एनपीएस के तहत जो टोटल अमाउंट है, उसका 40 प्रतिशत शेयर मार्केट में लगाया जाता है। पुरानी व्यवस्था में ऐसा कुछ भी नहीं था।

    इसके साथ ही यह गारंटी भी थी कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा उसे पेंशन के तौर पर मिलता था। इस नई व्यवस्था में इसकी कोई गारंटी भी नहीं है। यह तो शेयर मार्केट पर आधारित है। कर्मचारी जिस दिन रिटायर हो रहा है, उस दिन जैसा शेयर मार्केट होगा, उस हिसाब से उसे 60 प्रतिशत मिल जाएगा और बाकी के 40 प्रतिशत के लिए उसे पेंशन प्लान लेना होगा। उस पेंशन प्लान के आधार पर उसकी पेंशन निर्धारित होगी।

    ऐसे में मान लीजिए अगर किसी की पेंशन 2000 निर्धारित हो गई तो वह पेंशन उसे आजीवन मिलेगी। उसमें कोई उतार-चढ़ाव नहीं होगा. पुरानी व्यवस्था के तहत मान लीजिए अगर किसी की आखिरी सैलरी 50 हजार है तो उसे 25 हजार पेंशन मिलती थी। इसके अलावा हर साल मिलने वाला डीए और वेतन आयोग के तहत वृद्धि की सुविधा थी।

    लड़ाई इसी बात की है कि नई पेंशन व्यवस्था शेयर मार्केट आधारित व्यवस्था है। मान लीजिए कि कर्मचारी एक लाख रुपए जमा करता है। जिस दिन वह रिटायर होता है उस दिन शेयर मार्केट में उसके एक लाख का मूल्य 10 हजार है तो उसे 6 हजार रुपए मिलेंगे और बाकी 4 हजार में उसे किसी भी बीमा कंपनी से पेंशन स्कीम लेनी होगी। इसमें कोई गारंटी नहीं है। यही विरोध का मुख्य वजह है।