लखनऊ, जेएनएन। हिंदुत्व के साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के एजेंडे पर लगातार आगे बढ़ रही योगी सरकार ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला किया है। अयोध्या के दीपोत्सव मेले का प्रांतीयकरण किया गया है। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मेले के महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके प्रांतीयकरण की घोषणा की थी। इस फैसले से अब मेले पर होने वाला खर्च सरकार उठायेगी। इस वर्ष मेले के आयोजन पर करीब 1.33 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 13 प्रस्तावों पर मुहर लगी। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी राज्य सरकार के प्रवक्ता व खादी ग्रामोद्योग मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने दी। श्रीकांत ने बताया कि कैबिनेट ने अधिसूचना में संशोधन और परिवर्तन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है। जिलाधिकारी अयोध्या ने इसी वर्ष 15 जनवरी और तीन जुलाई के अपने पत्र के जरिये दीपोत्सव मेले का प्रांतीयकरण किए जाने का प्रस्ताव उपलब्ध कराया था। अभी तक इसका आयोजन पर्यटन विभाग द्वारा किया जाता है। मेले के अन्तर्राज्यीय स्वरूप के दृष्टिगत यह महत्वपूर्ण फैसला है। इसके बाद मेले का प्रबंधन जिलाधिकारी, अयोध्या द्वारा किया जाएगा। मेले के आयोजन पर 132 लाख 70 हजार खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। प्रवक्ता के मुताबिक यह व्ययभार शासन द्वारा धनराशि की उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा।

सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह एवं श्रीकांत शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य सेप्टिक नीति प्रबंधन का प्रस्ताव पास किया गया। इसके तहत सफाई कर्मियों की सुरक्षा से संबंधित सभी कदम उठाए जाएंगे। उनके ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 652 नगर निकायों में 5 करोड़ की आबादी है। इन निकायों के भीतर 72 लाख ऑन साइट कलेक्शन होता है, जिसमें 5560 एमएलडी कलेक्शन आता है। अभी तक अपशिष्ट जल प्रबंधन की 3300 एमएलडी क्षमता है, 1280 एमएलडी की क्षमता विकसित की जा रही है। 2019 तक सभी प्रारंभिक व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी।  2021 तक प्रदेश के सभी निकाय इससे जोड़े जाएंगे और 2023 तक इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। केंद्र, राज्य, निकाय और सीएसआर से फण्ड की व्यवस्था की जाएगी। 2023 के बाद इसके रख-रखाव की व्यवस्था का खर्च उपभोक्ता पर सरचार्ज लगाकर निकाला जाएंगा। जिनके घरों में सेप्टिक टैंक बने हैं उन्हें पांच वर्ष में 2500 रुपये या हर साल 500 रुपये का शुल्क देना होगा।

इन प्रस्तावों पर भी लगी मुहर

कैबिनेट बैठक में पेयजल के लिए अमृत योजना के तहत रायबरेली योजना फेज-तीन को मंजूरी दी गई। इसके लिए 187.17 करोड़ रुपया का का अनुमोदन किया गया है। जिसमें 50 प्रतिशत केंद्र, 30 प्रतिशत राज्य सरकार और 20 प्रतिशत प्रदेश का नगरीय निकाय देगा। रायबरेली में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में पास किया गया।

सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों के शिक्षकों को सातवें वेतनमान की मंजूरी दी गई। इससे एकेटीयू, मदनमोहन इंजीनियरिंग विवि और एचबीटीआई के कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। यह लागू करने पर 47.14 करोड़ खर्च आएगा। यूपी एडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट नियमावली में बदलाव किया गया है। चयन समिति में परिवर्तन किया गया है। प्रधानाचार्य की चयन समिति में उप शिक्षा सलाहकार की जगह एआईसीटीई का प्रतिनिधि शामिल होगा।

कैबिनेट ने विशेष सत्र के सत्रावसान को मंजूरी दी। प्रदेश सरकार ने संकल्प पारित किया कि गांधी के आदर्शों पर चलते हुए सयुंक्त राष्ट्र के तय एसडीजी गोल को प्राप्त करने के लिये प्रभावी कदम उठाएंगे।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में लाहौरी टोला के निर्मल मठ के भवन खरीद को मंजूरी दी गई। निर्मल मठ के भवन को इसके तहत कॉरिडोर के निकट 500 वर्ग मीटर की जमीन दी जाएगी।

यूपी मात्स्यिकी नियमावली में बदलाव को हरी झंडी दी गई। इसके तहत बोर्ड और कोष गठित किया गया है। कृषि उत्पादन आयुक्त अध्यक्ष होंगे। मछुआ समुदाय के विकास और सहयोग के लिये मदद की जाएगी। 100 करोड़ के कोष के साथ मत्स्य पालन विकास समिति का लक्ष्य है। अभी 25 करोड़ का बजट स्वीकृति की गई है।

कैबिनेट की मंजूरी से खनन विभाग में समूह क और ख की नियमावली आएगी। इसमें आरक्षण, आयु सीमा, प्रमोशन, वरिष्ठता आदि के वर्तमान सन्दर्भो को शामिल किया जाएगा।

राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के कर्मचारियों के लिए वित्त मंत्री की अध्यक्षता में कमिटी गठित की गई। 15 दिन में रिपोर्ट देगी जिसमें समायोजन, वीआरएस, निगम बन्द करने या चलाने सहित सभी पहलुओं पर विचार करेगी।

समाज में प्रचलित मान्यताओं को तोड़कर महिला सशक्तिरण का संदेश देने वाली फिल्म ‘सांड़ की आंख’ को कैबिनेट ने टैक्स फ्री करने का फैसला किया है।

पुलिस के खाली पीतल खोखा की नीलामी खत्म कर अब ई ऑक्शन कराया जाएगा।

सोनभद्र में जेपी सीमेंट के खनन क्षेत्र के लिये वन भूमि 586.178 हेक्टयर की अधिसूचना निरस्त कर 470.304 हेक्टयर गैर वन भूमि कृषि के लिये दी जाएगी। मडिहान से भूमि इसके लिये अधिग्रहित की जाएगी। जमीन का 4 गुना मूल्य, पौधरोपण से आने वाला खर्च वहन करने के बाद फैक्ट्री शुरू हो सकेगी।

Posted By: Dharmendra Pandey

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