लखनऊ, जेएनएन। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उन्नाव दुष्‍कर्म पीडि़ता के चाचा को धोखाधड़ी व कूटरचना के एक मामले में जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्त‍ि विकास कुंवर श्रीवास्तव की एकल सदस्यीय पीठ ने दिया।

याची के खिलाफ उन्नाव कोतवाली में आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 व 120बी में मुकदमा पंजीकृत हुआ था जिसमें आरोप था कि उन्होंने हत्या के प्रयास के एक मामले में उन्नाव की एक अदालत के फर्जी आदेश की कॉपी बनवाई। याची की दलील थी कि उक्त आदेश सह अभियुक्त नवीन सिंह ने निकलवाया था। याची की यह दलील भी थी कि वह 22 नवम्बर 2018 से ही जेल में है जबकि मामला मजिस्ट्रेट कोर्ट में विचारणीय है। बहुचर्चित उन्नाव दुष्‍कर्म प्रकरण में जेल में बंद पीड़िता के चाचा को न्यायिक अभिलेखों में सफेदा लगाने के प्रकरण में शुक्रवार को लखनऊ हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है।

पीड़िता के चाचा के अधिवक्ता ने बताया कि न्यायिक अभिलेखों में सफेदा लगाकर अनुचित लाभ लेने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। जमानत के लिए हाईकोर्ट की शरण ली गई थी, जिसमें उसे जमानत मिल गई है। मौजूदा समय में चाचा तिहाड़ जेल में बंद है। अगले कुछ दिनों में पीड़िता के चाचा को जेल से रिहा किया जा सकता है। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि अन्य सात मुकदमों में जमानत पहले ही मिल चुकी है।

ये है पूरा मामाल

उत्तर प्रदेश के उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से मिलने के लिए उनके घर के करीब रहने वाली एक 17 वर्षीय किशोरी एक महिला के साथ 4 जून 2017 को नौकरी मांगने के लिए पहुंची थी। जो महिला किशोरी को लेकर वहां गई थी उसका नाम शशि सिंह था। वो सेंगर की करीबी थी। उसी के बाद अचानक एक दिन उस किशोरी ने खुलासा किया कि विधायक ने उसके साथ बलात्कार किया है। जिसके बाद ये मामला सामने आया।

इससे पहले दिसंबर 2019 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को दोषी माना और सजा का ऐलान करते हुए सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही सेंगर पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को पीड़िता और उसके परिवार को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने का आदेश भी दिया था। 

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