…तो छोड़ दूंगा अध्यक्ष की कुर्सी, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भेदभाव के आरोप पर दिया बयान
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बुधवार को कहा कि अगर कोई उनके खिलाफ अविश्वास व्यक्त करता है तो वह अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि सदन नियमों से ही चलेगा और अगर कोई पीठ के खिलाफ बयान देता है तो वह नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि जवानी से लेकर आज तक अपना पूरा जीवन राजनीति को समर्पित किया है।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बुधवार को कहा कि कोई भी अविश्वास व्यक्त करेगा तो वे अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ देंगे। सदन नियमों से ही चलेगा। मेरे पास जाति का कोई आधार वोट बैंक नहीं है, मुझे सभी जातियों का समर्थन मिलता है। यदि कोई भी पीठ के खिलाफ बयान देता है, तो मैं नियमानुसार कार्रवाई करूंगा।
दरअसल, मंगलवार को एक विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था। बुधवार को सदन में सपा के बागी विधायक मनोज कुमार पांडेय ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र की जीवन रेखा विधानसभा की पीठ है। उसका सम्मान सर्वोच्च है। उसे बनाए रखने की सभी की संयुक्त जिम्मेदारी है।
पीठ पर जब आरोप लगता है तो वह संसदीय लोकतंत्र पर भी लगता है। आप पर एक सदस्य ने जिस तरह के आरोप लगाए हैं उससे मैं बेहद आहत हूं। इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए।
सपा ने किया पलटवार
सपा के डाॅ. संग्राम यादव ने मनोज पांडेय का नाम लिए बगैर कहा कि जनता को बीच में धोखा देने वालों के मुंह से संसदीय लोकतंत्र की बातें शोभा नहीं देती हैं। उन्होंने कहा कि पीठ का सम्मान हम सभी करते हैं।
सतीश महाना ने अंत में कहा कि मेरे पास जाति का आधार नहीं है। मैं उस विधानसभा क्षेत्र से आता हूं, जहां मेरी जाति के केवल एक हजार वोट हैं। सभी जाति और समाज ने मेरा साथ दिया है। मैंने सदन की गरिमा बढ़ाने के लिए हमेशा प्रयास किया है। जवानी से लेकर आज तक मैंने अपना पूरा जीवन राजनीति को समर्पित किया है।
इस दौरान कई आघात और आरोप भी सहे हैं। मुझसे कमजोर कोई नहीं होगा। मेरा कोई जातीय आधार नहीं है। काम और विधायकों का विश्वास ही मेरा वास्तविक आधार है, लेकिन यदि कोई पीठ के खिलाफ बयान देता है, तो मैं नियमानुसार कार्रवाई करूंगा।
विधानसभा अध्यक्ष के खेद जताने के बाद भी न बनी बात
विधानसभा में स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दे पर सदस्यों के बीच टूटी भाषाई मर्यादा से बिगड़ी बात बनाने की कोशिश तो की गई पर कारगर नहीं हुई। सपा सदस्यों के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही लगभग एक घंटे तक रुकी रही। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू की तब भी सपा सदस्य उनके आसन के सामने बैठकर नारेबाजी करते रहे। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में जैसा व्यवहार होना चाहिए दुख है कि आज उसका पालन नहीं हुआ। मर्यादा लांघना की अनुमति किसी को नहीं है।
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