लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। मध्यम वर्गीय सामान्य परिवार के बच्चों में पालीटेक्निक की पढ़ाई को लेकर खासा उत्साह रहता है। तीन साल के डिप्लोमा के बाद जूनियर इंजीनियर के पद पर चयन के अवसर के साथ इंजीनियरिंग में डिग्री का अवसर भी इसके बाद आसानी से मिल जाता है। इसी मंशा को भाप सूबे में हर जिले में निजी पालीटेक्निक संस्थानों की बाढ़ सी आ गई। पिछले तीन वर्षों में डिप्लोमा के प्रति कम होता रुझान का असर अब इस संस्थानों पर भी पड़ा है। रही सही कसर कोरोना संक्रमण ने पूरी कर दी। पिछले एक साल में सूबे मेंं 25 निजी संस्थानों पर ताला लग गया है। 

मंगलवार से एक बार फिर प्रवेश के लिए काउंसिलिंग का दौर शुरू होगा। सूबे की सभी 154 सरकारी और 19 सहायता प्राप्त संस्थानो की सीटें भरने के बाद निजी संस्थानोें का नंबर आता है। सरकारी में 38118, सहायता प्राप्त में 9898 सीटें हैं। इनके भरने के बाद 191142 निजी संस्थानों की सीटों को भरने का नंबर आता है। इस वर्ष परीक्षा के लिए 3,02066 ने पंजीयन कराया था और उनमे से 187640 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमे से मात्र 174770 पास हुए हैं। कुल सीटें 2,28527 हैं। वहीं निजी संस्थानों की संख्या की बात करेंं तो पिछले साल 1202 निजी संस्थान थे जो इस बार घटकर 1177 रह गए हैं। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के प्रभारी सचिव राम रतन ने बताया कि कोरोना काल का असर रहा है जिससे विद्यार्थी कम परीक्षा में बैठक हैं। निजी संस्थानों में सीधे प्रवेश की भी सुविधा दी जाती है। सीटें न भरने का कारण संस्थान की गुणवत्ता भी है जिसको सुधारने का प्रयास भी उन्हें करना चाहिए। 

तीन साल की परीक्षा पर एक नजर

  • 2021      कुल पंजीकृत अभ्यर्थी     3,02066
  • 2021      परीक्षा में शामिल           1,87440
  • 2020      पंजीकृत अभ्यर्थी             3,90894
  • 2020      परीक्षा में शामिल             2,40144
  • 2019      पंजीकृत अभ्यर्थी             4,36415
  • 2019      परीक्षा में शामिल             3,60787

पालीटेक्निक पर एक नजर

  • सरकारी संस्थान                   154
  • सहायता प्राप्त संस्थान             19
  • निजी संंस्थान                     1177
  • कुल सीटें                     2,28527
  • परीक्षा में शामिल           1,87440
  • उत्तीर्ण                         1,74770

Edited By: Vikas Mishra