Taste Of Uttar Pradesh: लखनऊ में चखें 75 जिलों के जायके, पहले दिन विभिन्न व्यंजनों की खुश्बू से महकी राजधानी
Taste Of Uttar Pradesh:मिठाइयों की रंगत, पारंपरिक पकवानों की खुशबू और स्थानीय उत्पादों की विविधता ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान को प्रदेश के स्वाद के बड़े ठिकाने में बदल दिया।

दो दिवसीय ''एक जिला-एक व्यंजन'' (ओडीओसी) प्रदर्शनी में 125 स्टाल लगाए गए हैं।

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महेन्द्र पाण्डेय, लखनऊ। लखनऊ में इंदिरानगर ए ब्लाक की विनीता मिश्रा बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान पहुंचीं तो ताजा बन रहे समोसे की खुशबू ने उन्हें आकर्षित किया। समोसे का जायका लेकर वह आगे बढ़ी ही थीं कि गरमागरम कचौड़ी और जलेबी का स्वाद लेने के लिए लगी भीड़ में वह भी शामिल हो गईं।
यहां पर तो बनारसी पान, लौंग लता और मलइयो सजे थे तो मथुरा का पेड़ा, आगरा का पेठा और मेरठ की गजक भी लोगों को लुभा रही थी। मिठाइयों की रंगत, पारंपरिक पकवानों की खुशबू और स्थानीय उत्पादों की विविधता ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान को प्रदेश के स्वाद के बड़े ठिकाने में बदल दिया। यहां एक ही परिसर में 75 जिलों की खानपान की विरासत प्रदर्शित हो रही है।
दैनिक जागरण और सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ''एक जिला-एक व्यंजन'' (ओडीओसी) प्रदर्शनी में 125 स्टाल लगाए गए हैं। हर स्टाल अपने जिले के खास स्वाद और पहचान को समेटे हुए है। यह आयोजन सिर्फ व्यंजन परोसने तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक खाद्य उत्पादों और उन्हें बनाने वाले छोटे उद्यमियों के हुनर को मंच भी मिला है।
प्रदर्शनी में मिठाइयों की खास रौनक दिखाई दे रही है। वाराणसी की तिरंगा बर्फी, लौंग लता और मलइयो, मथुरा का पेड़ा और माखन मिश्री, आगरा का पेठा और गजक, बाराबंकी का लाल पेड़ा और चंद्रकला, बहराइच का चमचम तथा श्रावस्ती की इमरती लोगों को आकर्षित कर रही हैं। मेरठ की रेवड़ी और गजक के साथ बरेली की बर्फी और सेवइयां भी अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। नमकीन और चटपटे स्वाद के शौकीनों के लिए भी खूब विकल्प हैं।
लखनऊ की चाट, अयोध्या की कचौड़ी और टिकिया, प्रयागराज की सब्जी-कचौड़ी और समोसा, गोंडा के इटियाथोक का दही बड़ा, गोरखपुर के लहसुन वाले छोले समोसे और झांसी का दाल-बाफला खास आकर्षण हैं। सुलतानपुर की कराहा पूड़ी और कोहड़े की सब्जी जिसने चखी, दीवाना बन गया। अमेठी की बड़ी वाली पूड़ी और गुड़ की खीर और सीतापुर के मिर्च पकौड़े भी लाजवाब हैं।
व्यंजनों के शौकीन शिक्षक राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि यहां खाद्य उत्पादों की अलग पहचान दिखाई दे रही है। लखीमपुर खीरी के केले, गुड़ और खोया पेड़े, कानपुर देहात के खाद्य तेल और लस्सी तथा रायबरेली के मसाले बेहद पसंद आए। कर्मचारी नेता सर्वेश कुमार मिश्रा को बलरामपुर की नारियल वाली बर्फी, कलाकंद व घमंजा अच्छा लगा। उन्होंने इनका स्वाद लेने के साथ घर के लिए पैक भी कराया।
रोजगार की संभावनाओं को नई पहचान
रायबरेली के मसाला कारोबारी अनिरुद्ध बाजपेयी ने कहा कि यह आयोजन छोटे कारोबारियों और पारंपरिक व्यंजन तैयार करने वालों के लिए अपने उत्पादों को नए ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर दे रहा है। लोग न केवल स्वाद चख रहे हैं, बल्कि उत्पादों की विशेषता, निर्माण की परंपरा और स्थानीय पहचान के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं। प्रदेश के सभी जिलों के व्यंजनों का यह संगम खानपान की विरासत को सहेजने के साथ स्थानीय उद्यमिता और रोजगार की संभावनाओं को भी नई पहचान दे रहा है।
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