यूपी में प्राथमिक स्कूलों के विलय को Supreme Court में चुनौती, कोर्ट ने जल्द सुनवाई का दिया भरोसा
उत्तर प्रदेश में कम छात्रों वाले 105 प्राथमिक विद्यालयों को दूसरे विद्यालयों में विलय करने के मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने जल्द सुनवाई की मांग की जिस पर कोर्ट ने सुनवाई का भरोसा दिलाया है। कोर्ट ने कहा कि यह सरकार का नीतिगत मामला है। याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में कम छात्रों वाले 105 प्राथमिक विद्यालयों का दूसरे विद्यालयों में विलय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सोमवार को याचिकाकर्ता की ओर से मामले पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया गया जिस पर कोर्ट ने सुनवाई का भरोसा दिलाया।
हालांकि कोर्ट ने टिप्पणी में यह भी कहा कि यह सरकार का नीतिगत मामला है। तैयब खान सुलमानी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर इलाहाबाद हाई कोर्ट के गत सात जुलाई के आदेश को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने कम छात्र संख्या वाले 105 प्राथमिक स्कूलों का अन्य विद्यालयों में विलय करने के निर्णय को चुनौती देने वाली कुछ छात्रों की ओर से दाखिल याचिका खारिज कर दी थी।
अब सुलमानी ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से विशेष अनुमति याचिका की अनुमति मांगी है। सोमवार को याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रदीप यादव ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बाग्ची की पीठ में याचिका का जिक्र करते हुए जल्द सुनवाई का अनुरोध किया।
यादव ने कहा कि अगर प्रदेश सरकार के 16 जून के आदेश पर रोक नहीं लगाई तो सौ से ज्यादा प्राथमिक स्कूल बंद हो जाएंगे और हजारों छात्रों की पढ़ाई में व्यवधान होगा और वे दूसरे स्कूलों में जाने को बाध्य होंगे।
यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के प्राथमिक स्कूल बंद करने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। पीठ ने यादव की दलीलों पर कहा कि यह सरकार का नीतिगत मामला है हालांकि कोर्ट याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गया।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के एडीशनल चीफ सेकरेट्री ने गत 16 जून को आदेश जारी किया, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे 105 प्राथमिक विद्यालयों का दूसरे विद्यालयों में विलय किये जाने के कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बाद 24 जून को उन 105 स्कूलों की सूची भी जारी कर दी गई जिनका दूसरे स्कूलों में विलय होना है। याचिका में कहा गया है कि 105 स्कूलों का अन्य स्कूलों में विलय का सीधा असर प्रदेश सरकार की संवेदनशील शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। कहा है कि हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करके भूल की है हाई कोर्ट ने वास्तविक तथ्यों और परिस्थितियों पर ध्यान नहीं दिया है।
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