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आजख खां की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार, सपा नेता ने ईडी की गिरफ्तारी को दी है चुनौती

Published: Mon, 02 Nov 2026 08:36 PM (IST)

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां ने ईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. आजम खां ने ईडी गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

  2. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई के लिए हामी भरी।

  3. जौहर ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने किया था गिरफ्तार।

एजेंसी, नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां ने रामपुर कारागार से रिहाई के दौरान ईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर माननीय न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए इस सुनवाई के लिए हामी भर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई हो सकती है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने आजम के वकील निजाम पाशा की दलीलों पर ध्यान दिया, लेकिन याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई हो सकती है।

गाजियाबाद की अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजा

रविवार को गाजियाबाद की एक विशेष अदालत ने आजम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। आजम खां के वकील का कहना था कि 78 वर्षीय सपा नेता को जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया था।

दो पैन कार्ड के मामले में आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला के रामपुर जेल से जमानत पर रिहा होने के थोड़ी ही देर बाद ईडी ने 31 अक्टूबर को आजम को गिरफ्तार कर लिया था। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आजम और उनके कथित सहयोगियों के विरुद्ध दर्ज 58 एफआईआर पर संज्ञान लेते हुए ईडी ने आजम और अन्य के विरुद्ध मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया है।

जौहर विश्वविद्यालय की कुर्क संपत्ति पर विवाद

ईडी ने 28 अक्टूबर को कहा था कि उसने मनी लांड्रिंग निरोधक कानून के तहत रामपुर स्थित आजम खां के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतें कुर्क की हैं। इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य 1,170 करोड़ रुपये है।

जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक कार्यों के लिए निर्धारित सरकारी धन का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया। आजम ने राज्य के शहरी विकास मंत्री के रूप में अपने प्रभाव और उत्तर प्रदेश जल निगम का इस्तेमाल कथित अनियमितताओं को अंजाम देने के लिए किया।

रामपुर विकास प्राधिकरण ने जुलाई में विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को ढहाने का आदेश दिया था, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने अपील दायर की थी। ईडी ने अगस्त में इस मामले में छापे मारे थे और आजम से पूछताछ की थी। आजम के विरुद्ध कई अन्य आपराधिक मामले भी चल रहे हैं।

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