40 से कम उम्र की 50 फीसद आबादी रेक्टम कैंसर की शिकार, लखनऊ के लोहिया संस्थान में कई मरीजों का सफल आपरेशन
लोहिया संस्थान में गैस्ट्रोसर्जरी के प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डा. अंशुमान पांडेय कहते हैं कि तीन-चार वर्षों से 40 वर्ष से कम उम्र के युवक-युवतियों में अधिक मामले सामने आ रहे हैं। इसमें मरीजों के रेक्टम में ऊपरी मध्यम व निचले लेयर में कैंसर देखने को मिल रहा है।

लखनऊ, [धर्मेन्द्र मिश्रा]। असंतुलित जीवनशैली और खान-पान में अशुद्धता, फास्टफूड, रसायनयुक्त और अत्यधिक तेल-मसाले और मिर्च युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन देश की युवा पीढ़ी के लिए घातक साबित हो रहा है। इसमें मरीजों के मलद्वार के बाहरी या अंदरूनी हिस्से पर ट्यूमर व लिम्फ नोड (गांठ) बन जाते हैं। लोहिया संस्थान में अब तक सामने आए मरीजों पर हुए विश्लेषण के अनुसार 40 वर्ष से कम उम्र की करीब 50 फीसद आबादी इस वजह से रेक्टम कैंसर की शिकार हो रही है। इसमें युवक और युवतियां दोनों शामिल हैं। ज्यादातर लोग तो शर्म और संकोच से रेक्टम कैंसर के तीसरे-चौथे स्टेज में पहुंच जाने के बाद आते हैं। ऐसे लोगों में फिर रिकवरी की गुंजाइश कम होती है।
लोहिया संस्थान में गैस्ट्रोसर्जरी के प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डा. अंशुमान पांडेय कहते हैं कि तीन-चार वर्षों से 40 वर्ष से कम उम्र के युवक-युवतियों में अधिक मामले सामने आ रहे हैं। इसमें मरीजों के रेक्टम में ऊपरी, मध्यम व निचले लेयर में कैंसर देखने को मिल रहा है। लोहिया संस्थान में अब तक जितने मरीज आए हैं, उनमें से 50 फीसद मरीज 40 वर्ष से कम उम्र के हैं। हाल ही में अयोध्या के 28 वर्षीय युवक, लखीमपुर की 34 वर्षीय युवती और लखनऊ के 20 वर्षीय युवक की भी सर्जरी की गई है। इनमें से निओ एडजुवैंट कीमोरेडियोथेरेपी (अत्याधुनिक कीमोरेडियोथेरेपी) से कैंसर वाले पार्ट की पहले छह से आठ हफ्ते सेंकाई की जाती है फिर जरूरत पड़ने पर दूरबीन विधि से माइनर सर्जरी की जाती है। सेंकाई व सर्जरी ट्यूमर व लिम्फ नोड के आकार पर निर्भर करती है।
यह है लक्षण : मल में खून आना, दर्द भरा मलत्याग, कब्ज, आंतों में रुकावट, मलद्वार में पीड़ा, भूख और वजन का कम होना इत्यादि। इसे कार्सिनोमा रेक्टम के नाम से भी जाना जाता है। शुरुआत में यह बिना कैंसर वाले पॉलिप के रूप में दिखाई दे सकते हैं।
'40 वर्ष से कम उम्र के 50 फीसद मरीजों में कार्सिनोमा रेक्टम के मामले सामने आ रहे हैं। लक्षणों को नजरंदाज कतई न करें। जितनी जल्दी इलाज शुरू करेंगे, उतनी जल्दी स्वस्थ होने की उम्मीद रहेगी। रेशेदार फल व सब्जियां और चोकरयुक्त अनाज अधिक खाएं। - डा. अंशुमान पांडेय, प्रो. व हेड गैस्ट्रोसर्जरी, लोहिया संस्थान
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