Sharad Purnima 2022: लखनऊ, जेएनएन। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसी कारण इसे रास पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी व्रत जैसे नामों से भी जानते हैं। इस वर्ष यानी 2022 में शरद पूर्णिमा 09 अक्टूबर रविवार को है।

इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग

शक्ति ज्योतिष केन्द्र लखनऊ के ज्योतिषाचार्य पण्डित शक्तिधर त्रिपाठी अनुसार पूर्णिमा तिथि रविवार को सूर्योदय के पहले से आरम्भ होकर देर रात्रि 02:24 बजे तक रहेगी। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और स्थिर योग की युति से यह पूर्णिमा अति महत्वपूर्ण हो रही है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी है।

रात भर होती है अमृत वर्षा

शरद पूर्णिमा को अन्य कई नामों से भी जाना जाता है। जैसे रास पूर्णिमा, कुमार पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा आदि। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा का चन्द्रमा रात भर अमृत की वर्षा करता है। अतः इस रात्रि को गाय के दूध में खीर पका कर चन्द्रमा की किरणों के नीचे रखने से उसमें अमरत्व के गुण आ जाते हैं।

शरद पूर्णिमा क्यों है महत्वपूर्ण

पौराणिक मान्यता है कि मां लक्ष्मी का समुद्र से आविर्भाव शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसी कारण इस दिन मां लक्ष्मी धरती में आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति हर बीमारी से छुटकारा पा सकता है। इसके साथ ही योगिराज श्री कृष्ण ने राधा रानी के साथ पहला रास शरद पूर्णिमा को ही रचाया था। कुमार कार्तिकेय का जन्म भी इसी दिन हुआ था।

कैसे करें पूजन ताकि प्रसन्न हों मां लक्ष्मी

पण्डित शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि शरद पूर्णिमा को रात्रि जागरण करने और माता लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व है। कलश स्थापन करके श्री विष्णु जी एवम् माता लक्ष्मी जी का शोडषोपचार या पंचोपचार पूजन करें। दूर्वा, कमल पुष्प, सिन्दूर और नारियल के लड्डू चढ़ाएं। श्री सूक्त का पाठ करें। सम्भव हो तो पुरुष सूक्त का भी पाठ करें या श्री विष्णु सहस्त्र नाम का जप करें। शरद पूर्णिमा के दिन स्नान करने के बाद तुलसी पूजा करें और शाम को दीपक जलाएं। ऐसा करने से सुख-समृद्धि की वृद्धि होगी।

Edited By: Umesh Tiwari

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