लखनऊ, जागरण संवाददाता। इटौंजा के महोना गांव में रहने वाला सत्येंद्र तीन वर्ष बाद अपने घर लौट पाया। चाइल्‍ड लाइन ने बच्‍चे को अपने परिवार से मिलाया। तीन साल पहले सत्येंद्र दोस्तों के साथ ढाबे पर खाना खाने गया था। वहीं पर कुछ ट्रक ड्राइवर खाना खा रहे थे, उन्होंने बच्चों को अपने साथ चलने को कहा। सारे बच्चे भाग गए, पर सत्येंद्र वही रह गया। सत्येंद्र ने बताया कि कि उसके खाने में कुछ था जिससे वह बेहोश हो गया और वो लोग उसे अपने साथ पंजाब ले गए। वहां पर उसको बंधुआ मजदूर की तरह रखा गया। सारा काम करवाते थे, मारते थे।

फिर ट्रक ड्राइवर ने उसे किसी और को बेच दिया था जहां और भी छोटे बच्चे थे। उन्हें सुबह पांच बजे उठा दिया जाता था, वहां करीब 150 गाय-भैंसे थीं। बच्चों को दिन में दो बार ही खाना मिलता था- दोपहर 12 बजे और रात को नौ बजे । रात में सभी बच्चों के पैरों में जंजीर बांध दी जाती थी। लगातार तीन साल ऐसे ही निकल गए। बच्चे को गुरुद्वारे से गुरु मंत्र भी दिलाया गया, पंजाबी सिखाई गई और पगड़ी भी पहना दी गई। उसे लगने लगा की अब वह यहीं रहेगा । एक बार जब कबड्डी के लिए उसे गुरुद्वारे ले गए तो सबका ध्यान खेल में था और वह मौका देख कर भाग निकला और अमृतसर पहुंच गया । स्टेशन पर एक सफाईकर्मी से उसकी बात हुई जिसने रेलवे चाइल्डलाइन को सूचना दी ।

रेलवे चाइल्डलाइन ने बच्चे की सूचना लखनऊ चाइल्डलाइन को दी । लखनऊ चाइल्डलाइन ने इटौंजा थाने से उसके ग्राम महोना की पुष्टि की । परिवारीजन बच्चे को गांव लेकर पहुंचे। गांव में मिठाइयां बांटी गईं, बच्चे के स्वागत के लिए नगाड़ा भी बजाया गया । बच्चे से मिलने चाइल्डलाइन टीम से संगीता शर्मा व विजय पाठक मौके पर गए।

Edited By: Rafiya Naz