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लखनऊ, जेएनएन। बाबा साहब भीम राव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) प्रशासन रैगिंग की घटनाओं को रोकने में फेल साबित हो रहा है। केंद्रीय विश्वविद्यालय में तीन दिन के भीतर रैगिंग के दो बड़े मामलों से विश्वविद्यालय प्रशासन और एंटी रैगिंग सेल की भूमिका पर भी सवाल खड़ा होना शुरू हो गया है। ताजा मामला विश्वविद्यालय के बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों द्वारा सीनियर छात्रों पर रैगिंग का सामने आया है। हालांकि विवि प्रशासन पूरे मामले को एक सिरे से खारिज कर रहा है।

मामले को दबाने में जुटा बीबीएयू प्रशासन

सूत्रों के अनुसार, मामला गुरुवार दोपहर एक बजे का है। बीटेक प्रथम वर्ष के छात्र क्लास में बैठे थे। तभी बीटेक के सीनियर छात्र क्लास में आ गए। सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों से परिचय लेना शुरू कर दिया। सीनियर द्वारा जूनियर छात्रों से उनकी हॉबी के बारे में पूछा जाने लगा। इसपर बीटेक प्रथम वर्ष के एक छात्र ने फोन पर तत्काल रैगिंग का आरोप लगाते आने की गुहार लगी। मौके पर एंटी रैगिंग सेल के दो सदस्य पहुंचे। मगर उनके पहुंचने से पहले ही छात्र वहां से भाग निकले। 

बताया जा रहा है कि छात्रों से पूछताछ में इस बात की भी पुष्टि हुई कि वह इंट्रोडक्शन ले रहे थे। वहीं बीबीएयू प्रशासन की दलील है कि बच्चों में फ्रेशर पार्टी की तैयारी की बात चल रही थी। मगर सवाल इस बात का है कि फिर जूनियर छात्र ने एंटी रैगिंग सेल को फोन किस मकसद से किया। 

गौरतलब है कि बीबीएयू में तीन दिन पूर्वबीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा ने प्रॉक्टर प्रो. रामचंद्र को विवि गेट के पास मैनेजमेंट के एक सीनियर छात्र द्वारा उससे रैगिंग किए जाने की शिकायत की थी। मामले में छात्रा द्वारा गंभीर आरोप लगाए थे। मामले को एंटी रैगिंग कमेटी के समक्ष रखा गया था। इसके बाद से मामले की जांच की जा रही है।

प्रॉक्टर बीबीएयू प्रो रामचंद्र का कहना है कि छात्र ने फोन पर एंटी रैगिंग सेल को सूचना दी थी। सूचना मिलते ही एंटी रैगिंग सेल के सदस्य मौके पर पहुंच गए। जूनियर छात्रों से पूछताछ पर यह रैगिंग जैसी बात सामने नहीं आई। न ही कोई लिखित शिकायत मिली है। 

 

Posted By: Divyansh Rastogi

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