लखनऊ, जेएनएन। असमंजस और इंतजार के बाद आखिरकार एसजीपीजीआइ के निदेशक पर अंतिम निर्णय हो गया है। चंडीगढ़ के स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआइ) में हेप्टोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो.राधाकृष्ण धीमान को लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइ) का निदेशक नियुक्त किया गया है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रो.धीमान को एसजीपीआइ का निदेशक बनाने के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रो.धीमान की नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु तक के लिए की गई है। एसजीपीजीआइ के निदेशक प्रो.राकेश कपूर को वीआरएस दिए जाने के बाद पीजीआइ निदेशक का कार्यभार डॉ.राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान को निदेशक प्रो.एके त्रिपाठी को सौंपा गया था। इसी के साथ नए निदेशक की चयन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। हालांकि, चयन प्रक्रिया से जुड़ी राजभवन की एक बैठक निरस्त होने के बाद निदेशक पद के लिए आए नामों पर चर्चा शुरू हो गई थी। खासतौर पर एक नाम को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी।

निदेशक पद के लिए राज्य स्तर पर पिछले दिनों तीन नाम अंतिम तौर पर तय किए गए थे। इसमें लखनऊ से शामिल नाम पर मुहर लगने की संभावना जताई जा रही थी, जबकि इसी नाम को लेकर शिकायतें भी थीं। इस नाम के पीछे शीर्ष स्तर पर लॉबिंग करने की भी चर्चा थी। बताया जा रहा था कि राज्यपाल इन बातों को लेकर नाराज थीं, इसीलिए इस महीने के शुरुआती दिनों में होने वाली बैठक को राजभवन ने टाल दिया था, जबकि इस बैठक में तीन में से किसी एक नाम को तय किया जाना था। अब चंडीगढ़ के प्रो.धीमान का नाम तय होने पर चिकित्सा शिक्षा से जुड़े अधिकारियों ने गड़बड़ी न होने देने के लिए राज्यपाल का आभार भी जताया है।

नामों पर विवाद के चलते हुई निदेशक की नियुक्ति में देरी

एसजीपीजीआइ के निदेशक प्रो.राकेश कपूर को वीआरएस दिए जाने के बाद पीजीआइ निदेशक का कार्यभार डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान को निदेशक प्रो. एके त्रिपाठी को सौंपा गया था। इसी के साथ नये निदेशक की चयन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। हालांकि चयन प्रक्रिया से जुड़ी राजभवन की एक बैठक निरस्त होने के बाद निदेशक पद के लिए आए नामों पर चर्चा शुरू हो गई थी। खास तौर पर एक नाम को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी।

निदेशक पद के लिए राज्य स्तर पर पिछले दिनों तीन नाम अंतिम तौर पर तय किए गए थे। इसमें लखनऊ से शामिल नाम पर मुहर लगने की संभावना जताई जा रही थी, जबकि इसी नाम को लेकर शिकायतें भी थीं। इस नाम के पीछे शीर्ष स्तर पर लॉबिंग करने की भी चर्चा थी। बताया जा रहा था कि राज्यपाल इन बातों को लेकर नाराज थीं, इसीलिए इस महीने के शुरुआती दिनों में होने वाली बैठक को राजभवन ने टाल दिया था, जबकि इस बैठक में तीन में से किसी एक नाम को तय किया जाना था। अब चंडीगढ़ के प्रो.धीमान का नाम तय होने पर चिकित्सा शिक्षा से जुड़े अधिकारियों ने गड़बड़ी न होने देने के लिए राज्यपाल का आभार भी जताया है।

 

Posted By: Dharmendra Pandey

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