नहीं चलेगी निजी आइटीआइ की मनमानी, 18 हजार तक सालाना फीस तय
संस्थानों की मनमानी पर रोक को विभाग ने तीन साल के लिए तय की फीस। प्रदेश के 2781 निजी आइटीआइ पर लागू होगा नियम, दो लाख छात्रों को फायदा।
लखनऊ, (जितेंद्र उपाध्याय)। तकनीकी शिक्षा के नाम पर मनमानी फीस वसूलने वाले निजी आइटीआइ संस्थानों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत ग्रेडिंग और संस्थान की सुविधाओं के आधार पर फीस का निर्धारण किया गया है। अगस्त से शुरू होने वाले नए सत्र से न केवल इन संस्थानों को प्रवेश से पहले विभाग के वेबपोर्टल पर विद्यार्थियों का पंजीयन कराना होगा, बल्कि निर्धारित फीस ही लेनी होगी। इससे दो लाख छात्रों का फायदा होगा। गैर तकनीकी कोर्स की फीस पंद्रह हजार रुपये और तकनीकी कोर्स की फीस अठारह हजार रुपये सालाना तय की गई है।
पॉलीटेक्निक, इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट की भांति अब व्यावसायिक परीक्षा परिषद की प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से ही निजी आइटीआइ में भी प्रवेश होंगे। इसके साथ ही प्रशिक्षण एवं सेवायोजन विभाग की ओर से फीस का निर्धारण भी कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत राजधानी के 40 समेत प्रदेश के सभी 2781 निजी आइटीआइ संस्थानों में अगले तीन साल तक फीस में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
पांच साल से चल रहा मामला
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की ओर से वर्ष 2014 में निजी आइटीआइ संस्थाओं की फीस का निर्धारण किया गया था। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने निजी आइटीआइ में एक वर्ष के कोर्स के लिए जो फीस निर्धारित की थी, वह बहुत कम थी। इस मुद्दे पर प्राइवेट आइटीआइ वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से कई बार धरना-प्रदर्शन किया गया। प्राइवेट आइटीआइ वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष उमेश मिश्र का कहना है कि सभी संस्थानों में सुविधाएं अलग-अलग हैं। ऐसे में एक समान फीस निर्धारित करना अनुचित है।
प्रशिक्षण एवं सेवायोजन के निदेशक प्रांजल यादव ने बताया कि सभी निजी संस्थानों की फीस का निर्धारण कर दिया गया है। अगस्त से शुरू होने वाले सत्र से इसे लागू कर दिया जाएगा। निर्धारित फीस से अधिक फीस लेने पर सख्त कार्रवाई होगी। यदि कोई संस्थान फीस कम होने की बात कह रहा है तो वह संस्थान की सुविधाओं की जानकारी के साथ दोबारा आवेदन कर सकता है।
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